माला के 108 दानें क्यों

माला के 108 दानें क्यों

ब्रह्मांड में प्रकृति के नियंत्रण से निरंतर चारों दिशाओं में घूमती हुई नक्षत्रमाला में कुल 27 नक्षत्रों की खोज की तो आज भी वही हैं और प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण होते हैं, अत: 27 x4=108 अर्थात् न्यून व अधिक का प्रश्न ही नहीं।



दूसरा कारण-अहोरात्र में मनुष्य के श्वासों की स्वाभाविक संख्या 21 600 होती है, जो वेद-शास्त्रों में निश्चित की गई है।

अहोरात्र में यदि आधा समय शयन, भोजन और अन्यान्य सांसारिक कार्यों का या लोक साधना का माना जाए तो आधा परमार्थ साधना का माना जाए तथा 21600 श्वासों के आधे 10 800 श्वास हरिभजन के समझने चाहिए। शास्त्र कहते हैं कि इन्हें व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए।

इसके अनुसार प्रतिदिन यदि एक माला का भी जाप किया जाए तो सार्थक है, क्योंकि विधिवत् किया गया जाप शास्त्रों के अनुसार सौ गुणा हो जाता है. अर्थात् 108x 10800 होता है|अर्थात् मनुष्य के आधे श्वासों के बराबर हो जाता है।

चौथा कारण-'शतपथ ब्राह्मण के दसवें कांड में' अथ सर्वाणि भृतानि प्रघट्ट में लिखा है कि एक संवत्सर के दस हजार आठ सौ मुहूर्त होते हैं और इतने ही वेदत्रयी के पंक्ति युग्म होते हैं। पुरुष की पूर्णायु सौ वर्ष मानी गई है। यदि 10 800 मुहूर्तओं  को जीवन के वर्षों की संख्या 100 पर विभाजित कर दिया जाए तो 108 होते हैं। नित्य 108 एक माला जाप से पंक्ति पाठ संपन्न हो जाएगा।

कारण तो और भी बहुत हैं। अधिक बारीकी में न जाकर मात्र उपरोक्त से ही यदि समझ नहीं आया तो गहराई में जाने से कहां समझ आएगा। यदि केवल जाप संख्या मात्र जानना माला का उद्देश्य होता तो फिर नि:संदेह सौ दाने या इसी प्रकार किसी पूरी संख्या के दानों की माला ही उपयुक्त होती, क्योंकि इसमें अनेक आध्यात्मिक और वैज्ञानिक प्रमाण विद्यमान हैं, इसलिए माला के 108 दाने ही होने चाहिए।



हमारे बारे में

न्‍यूज़ पुराण (PURAN MEDIA GROUP)एक कोशिश है सत्‍य को तथ्‍य के साथ रखने की | आपके जीवन में ज्ञान ,विज्ञान, प्रेरणा , धर्म और आध्‍यात्‍म के प्रकाश के विस्‍तार की |
News Puran is a humble attempt to present the truth with facts. To spread the light of knowledge, promote scientific temper, inspiration, religion and spirituality in your life.


संपर्क करें

0755-3550446 / 9685590481



न्‍यूज़ पुराण



समाचार पत्रिका


श्रेणियाँ