अंग्रेज क्यों पढ़ना चाहते थे वेद पुराण ? क्या इसके पीछे कोई साजिश थी?

मैक्समूलर ने सन् 1866 में अपनी पत्नी को भेजे पत्र में लिखा था-

This edition of mine and the translation of the Veda will, hereafter, tell to a great extent on the fate of India. It is the root of their religion and to show them what the roots. I feel sure, is the only wayof uprooting all that has sprung from it during the last three thousand years
-Life and liters of Frederick Maxmueller, Vol. 1. Chap. XV. P. 34

Letter
(मेरा यह संस्करण और वेद का अनुवाद कालान्तर में भारत के भाग्य को दूर तक प्रभावित करेगा। यह उनके धर्म का मूल है। मेरा यह निश्चित मत है कि उन्हें यह दिखाना कि यह मूल कैसा है, गत तीन हजार वर्षों में इससे उत्पन्न होने वाली सब चीजों को जड समेत उखाड़ फेंकने का एकमात्र उपाय है।)

16 दिसम्बर 1868 को भारत-सचिव ड्यूक ऑफ आर्गाइलको एक पत्र में मैक्समूलर ने लिखा-The ancient religion of India is doomed. Now, if Christianity does not step in, whose fault will-bid, Chap. XVI.P.378

(भारत का प्राचीन धर्म अब नष्ट प्रायः है। अब यदि ईसाइयत उसका स्थान नहीं लेती, तो यह किसका दोष होगा?)ईसाइयत के प्रचार की दिशा में मैक्समूलर के प्रयासों की सराहना करते हुए उसके घनिष्ठ मित्र ई. बी. पुसे ने लिखा था-

Your work will mark a new era in the efforts for the conversion of lndia(भारत को ईसाई बनाने की दिशामें किया गया आपका प्रयास एक नये युग का सूत्रपात करनेवाला होगा।)

-सत्यार्थ भास्कर (स्वामी विद्यानन्द सरस्वती) से उद्धृत्


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