क्यों मनाई जाती है चैत्र नवरात्र‍ि, ये है पौराणिक कथा

क्यों मनाई जाती है चैत्र नवरात्र‍ि, ये है पौराणिक कथा
माता के नवरात्र साल में दो बार आते हैं। शारदीय नवरात्र और चैत्र नवरात्र। भारत में यह त्यौहार बड़ी धूम धाम से मनाया जाता हैं। चैत्र मास शुक्ल पक्ष में जो नवरात्रि‍ व्रत रखें जाते हैं वे चैत्र नवरात्र कहलाते हैं। 2020 में इस बार 25 मार्च से चैत्र नवरात्र‍ि शुरू हो रही है जो 3 अप्रैल तक चलेगी। कई बार तिथियों के हेर-फेर से पूजा आठ दिन भी होती है। यानी एक ही दिन में दो नवरात्रों की पूजा होती है। हिन्दू धर्म में नवरात्रों को पूरे धूमधाम से पूजा-अर्चना के साथ उपवास करके मनाया जाता है। चैत्र नवरात्रि को लोग र्स्लिये ख़ास मानते हैं क्‍योंकि हिन्दु कैलेण्डर का ये पहला दिवस होता है। लोग साल के पहले दिन से नौंवे दिन तक पूरी श्रद्धा से चैत्र नवरात्रि का पूजन करते हैं।

Image result for navratri
नवरात्र‍ि में मां दुर्गा के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। ऐसी मान्‍यता है कि इन नौ दिनों के दौरान मां दुर्गा धरती पर ही रहती हैं। ऐसे में बिना सोचे-समझे भी यदि किसी शुभ कार्य की शुरुआत की जाए तो उस पर मां की कृपा जरूर बरसती है और वह कार्य सफल होता है।

ऐसी मान्‍यता है कि चैत्र नवरात्र‍ि के पहले दिन मां दुर्गा का जन्‍म हुआ था और मां दुर्गा के कहने पर ही ब्रह्मा जी ने सृष्‍ट‍ि का निर्माण किया था। इसीलिए चैत्र शुक्‍ल प्रतिपदा से हिन्‍दू वर्ष शुरू होता है। नवरात्र‍ि के तीसरे दिन भगवान विष्‍णु ने मत्‍स्‍य रूप में जन्‍म लिया था और पृथ्‍वी की स्‍थापना की थी।

ऐसी भी मान्‍यता है कि भगवान विष्‍णु का 7वां अवतार भगवान राम का जन्‍म भी चैत्र नवरात्र‍ि में ही हुआ था। इसलिए धार्मिक दृष्‍ट‍ि से भी चैत्र नवरात्र का बहुत महत्‍व है। ऐसा माना जाता है कि नवदुर्गा पूजन के ये नौ दिन बहुत शुभ होते हैं। इसलिए इन नौ दिनों के दौरान कोई भी शुभ कार्य बिना सोच-विचार के कर लेना चाहिए। क्‍योंकि पूरी सृष्टि को अपनी माया से ढ़कने वाली आदिशक्ति इस समय पृथ्वी पर होती है।
जानें क्यों मनाते हैं चैत्र नवरात्र‍-
चैत्र नवरात्र‍ि के पीछे एक पौराणिक कथा है। दस सिर वाले और शि‍व का आर्शीवाद हासिल करने वाले शि‍व भक्‍त रावण की ताकत के बारे में सभी देवी-देवताओं को ज्ञात था। इसलिए सीता को लंका से वापस लाने के लिए जब श्रीराम रावण से युद्ध करने चले तो उन्‍हें देवताओं ने शक्‍त‍ि की पूजा करने और उनसे विजयश्री का आर्शीवाद लेने की सलाह दी।

भगवान राम ने ऐसा ही किया। भगवान राम ने मां को चढ़ाने के लिए 108 नीलकमल की व्‍यवस्‍था की और पूजा शुरू कर दी। उधर रावण को जब यह ज्ञात हुआ कि श्री राम जीत के लिए मां चंडी की पूजा कर रहे हैं तो उसने भी मां की पूजा शुरू कर दी। रावण किसी भी हाल में अपनी हार नहीं चाहता था, इसलिए उसने राम के 108 पुष्‍पों में से एक चुरा लिया और अपने राज्‍य में चंडी पाठ करने लगा।

राम को इस बात का पता चला और उन्‍होंने कम पड़ रहे एक नीलकमल की जगह अपनी एक आंख मां को समर्पित करने की सोच ली। क्‍योंकि राम को कमल-नयन नवकंज लोचन भी कहा जाता है। इसलिए श्री राम ने तूणीर से अपनी आंख निकलने लगे। तभी मां प्रकट हुईं और उन्‍होंने भगवान राम की पूजा से खुश होकर उन्‍हें विजयश्री का वरदान दे दिया|

दूसरी ओर रावण भी जोर लगाकर चंडी पाठ कर रहा था। तभी हनुमान जी ब्राह्मण का बालक रूप लेकर पूजा स्‍थान पर पहुंच गए। ब्राह्मण जयादेवी भूर्तिहरिणी श्‍लोक का पाठ कर रहे थे। लेकिन हनुमान जी ने उसका उच्‍चारण हरिणी की जगह करिणी करवा दिया। इससे मां चंडी कूपित हो गईं। उन्‍होंने रावण को श्राप दे दिया। दरअसल, हरिणी का अर्थ होता है हरने वाली, और करिणी का अर्थ होता है पीड़ा देने वाली।इसके बाद राम ने रावण को परास्‍त कर दिया। इसलिए इस त्‍योहार को बुराई पर अच्‍छाई की जीत के रूप में भी मनाते हैं और नवरात्र‍ि के आखिरी दिन रामनवमी के रूप में मनाते हैं।

PURAN DESK



हमारे बारे में

न्‍यूज़ पुराण (PURAN MEDIA GROUP)एक कोशिश है सत्‍य को तथ्‍य के साथ रखने की | आपके जीवन में ज्ञान ,विज्ञान, प्रेरणा , धर्म और आध्‍यात्‍म के प्रकाश के विस्‍तार की |
News Puran is a humble attempt to present the truth with facts. To spread the light of knowledge, promote scientific temper, inspiration, religion and spirituality in your life.


संपर्क करें

0755-3550446 / 9685590481



समाचार पत्रिका


श्रेणियाँ