60000 साल तक क्यों रहना पड़ेगा नरक में यदि की आत्महत्या ? Why is suicide and abortion called a sin ?

60000 साल तक क्यों रहना पड़ेगा नरक में यदि की आत्महत्या ? Why is suicide and abortion called a sin ?

आज बहुत से कारणों से देश में आत्महत्या की प्रव्रत्ति बढ़ती जा रही है. यह बात सही है कि कई बार ऐसी परिस्थतियाँ सामने आ जाती हैं, जब सामने कोई रास्ता नहीं दीखता और व्यक्ति को आत्महत्या करना ही एकमात्र विकल्प लगता है. इसी तरह देश में गर्भपात की प्रवृत्ति भी बढ़ रही है. लेकिन भारतीय धर्म और संस्कृति में इन दोनों कर्मों को घोर पाप माना गया है. पराशरस्मृति में कहा गया है कि आत्महत्या करने वाले को 60 हज़ार वर्षों तक ऐसे नरक में रहना पड़ता है, जो खून और मवाद से भरा है. वह करीब 6 हज़ार जन्मों तक कष्ट पाता है. इसके बाद उसे फिर सूअर की योनि मिलती है. आत्महत्या करने वाले का न लोक सुधरता है न परलोक. आत्महत्या करने वाले का सूतक मान्य नहीं किया गया है. कहा गया है कि उसकी मृत्यु पर आंसू न गिराए और उसका अग्नि संस्कार भी न करें. उसके अस्थि संचय और श्राद्ध-तर्पण की भी मनाही की गयी है. मनुष्य को अपनी हत्या करने का अधिकार नहीं है. कैसी भी परिस्थिति हो, लेकिन आत्महत्या नहीं करना चाहिए.

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