सनातन धर्म-परम्परा में इतनी अधिक साधन प्रणालियाँ क्यों -दिनेश मालवीय

सनातन धर्म-परम्परा में इतनी अधिक साधन प्रणालियाँ क्यों -दिनेश मालवीय

dineshसनातन धर्म-परम्परा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें One Size Fit All की अवधारणा को मान्य नहीं किया गया है. यानी हर चीज हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं है. दुनिया में करीब तीन सौ धर्म हैं, लेकिन सनातन को छोड़कर सभी धर्मों में कोई एक साधा-प्रणाली निर्धारित है, जिसका पालन करना सम्बंधित धर्म को मानने वालों के लिए अनिवार्य होता है. सबका कोई एक निर्धारित धर्म-ग्रंथ है और कोई संस्थापक है.


लेकिन सनातन धर्म-परम्परा का विषय अलग है. इसमें मनुष्य के लिए मोक्ष को अल्टीमेट गोल निर्धारित किया गया है. इस प्रकार लक्ष्य तो निर्धारित है, लेकिन उसे पाने के उपाय या मार्ग अलग-अलग हैं. सभी उपायों का एक मात्र लक्ष्य है मन को शुद्ध करना. हर व्यक्ति को अपने स्वभाव के अनुसार अपने लिए कोई मार्ग चुनने की पूरी स्वतंत्रता है. कोई व्यक्ति स्वभाव से भावुक है, तो उसके लिए भक्ति का मार्ग है; कोई बहुत पुरुषार्थ का विश्वास करने वाला है, तो उसके लिए योग का मार्ग उपयुक्त होगा; कोई यांत्रिक विधि से मन की शुद्धि चाहता है,तो वह तंत्र का अबलंवन ले सकता है; रजोगुण प्रधान व्यक्ति कर्मयोग के मार्ग पर चल सकता है. जप की माला में 108 गुरिये होते हैं. कुछ जानकार लोगों के अनुसार ये सभी गुरिये किसी साधन-प्रणाली का प्रतीक हैं. उनके अनुसार 108 साधन प्रणालियाँ हैं.

इसी प्रकार सनातनियों को अपना इष्ट चुनने की भी पूरी स्वतंत्रता है. माना गया है कि सभी रूप परमात्मा के हैं. अपने स्वाभाव और रुझान के अनुसार व्यक्ति अपने इष्ट का चयन कर सकता है. कोई देवी माँ को इष्ट मानता ही, कोई शिव को, कोई राम को, कोई कृष्ण को, कोई हनुमान को. इसके अलावा भी अनेक देवी-देवता हैं, जिन्हें लोग अपना इष्ट मानकर धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ते रहते हैं. ये सारे भेद एक सीमा के बाद एक हो जाते हैं. जिस प्रकार सभी नदियाँ सागर में मिल जाती है, उसी प्रकार सभी साधन प्रणालियाँ परमात्मा में जाकर विलीन हो जाती हैं. थोड़ी भी प्रगति होने पर साधक को सभी देवी-देवताओं की एकता का स्पष्ट अनुहाव हो जाता है. उसे अनुभव हो जाता है कि कोई ईश्वर को किसी भी रूप मानता हो, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. मूल उद्देश तो चित्त को शुद्ध करना होता है, जो अपने स्वाभाव और रुचि के अनुसार किसी को भी इष्ट बनाकर प्राप्त किया जा सकता है.

Baanke Bihari Mandir

हालाकि सनातन धर्म में इतनी अधिक साधन प्रणालियाँ हैं कि उनकी संख्या निर्धारित करना मुश्किल है. इसके कारण विभिन्न साधन प्रणालियों का पालन करने वालों में कुछ मतभेद होते रहे हैं, जिनमें समय-समय पर सामंजस्य स्थापित किया जाता रहा है. हर प्रणाली का अनुयायी अपने मार्ग को ही सबसे अच्छा मानता है. ऐसा मानना बहुत लाभदायक भी होता है, क्योंकि उसमें उसका विश्वास दृढ़ होता है. लेकिन जब वह दूसरों की साधन प्रणाली को अपनी प्रणाली से कमतर मानने लगता है, तो दिक्कतें खड़ी होती  हैं. इसीलिए सभी सद्गुरु इस बात पर बहुत ज़ोर देते हैं कि साधकों को दूसरी साधन प्रणालियों का समान रूप से आदर करना चाहिए. जब तक हमें दूसरों की साधन प्रणाली में दोष या कमी नज़र आती है, तब तक यह समझना चाहिए कि हम अपनी साधना ठीक से नहीं कर रहे.

सनातन धर्म-दर्शन कहता है कि, “एक ही सत्य को विद्वान अलग-अलग तरह से व्यक्त करते हैं”. यह भी कहा गया है कि, “ब्रह्म एक ही है, दूसरा कोई है ही नहीं”. इस तरह के वाक्यों से हमारे शास्त्र भरे पड़े हैं. हमारा मानना है कि सारे रास्ते एक ही मंजिल तक पहुँचते हैं. यही कारण है कि सनातन धर्म को मानने वालों ने कभी किसीका धर्मांतरण का प्रयास नहीं किया. यही माना गया कि जो भी जिस भी विधि से ईश्वर तक पहुँच चाहता है, वह पहुँच ही जाएगा. किसीको भी उसकी स्वाभाविक श्रद्धा से डिगाने का कभी कोई प्रयास नहीं किया गया.

सनातन धर्म में कहीं भी ऐसा नहीं कहा गया कि इसको मानने वालों को ही सत्य की प्राप्ति होगी. दूसरे अनेक धर्मों के मानने वाले कहते हैं कि उनके धर्म को मानने वालों को ही ईश्वर की प्राप्ति होगी या उन्हें ही स्वर्ग मिलेगा. बाकी सभी लोग नरक में जाएँगे. सनातन धर्म अकेला ऐसा धर्म है जो पूरी मानवता के कल्याण की प्रार्थना करता है. पूरे विश्व को एक परिवार मानता है. हर व्यक्ति को ईश्वर का प्रिय होने का अधिकारी मानता है.

यही कारण है कि युगों-युगों से संसार के किसी भी कोने से और किसी भी धर्म के अनुयाइयों के आगमन पर हमने न केवल उनका स्वागत किया, बल्कि उन्हें उनके धर्म के पालन के लिए सुविधाएँ और सहयोग भी प्रदान किया. यहाँ के हिन्दू राजाओं ने मस्जिदों और चर्चों के निर्माण के लिए मुफ्त ज़मीनें प्रदान कीं. स्थानीय लोगों ने इन लोगों से वैवाहिक सम्बन्ध भी स्थापित किये. कभी “पराये” की भावना रही ही नहीं.

यही कारण है कि सनातन में इतनी अधिक साधन प्रणालियाँ या मत-मतान्तर हैं, लेकिन सबका लक्ष्य एक है.


हमारे बारे में

न्‍यूज़ पुराण (PURAN MEDIA GROUP)एक कोशिश है सत्‍य को तथ्‍य के साथ रखने की | आपके जीवन में ज्ञान ,विज्ञान, प्रेरणा , धर्म और आध्‍यात्‍म के प्रकाश के विस्‍तार की |
News Puran is a humble attempt to present the truth with facts. To spread the light of knowledge, promote scientific temper, inspiration, religion and spirituality in your life.


संपर्क करें

0755-3550446 / 9685590481



न्‍यूज़ पुराण



समाचार पत्रिका


श्रेणियाँ