आत्मसन्तोष के लिए कर्म करें (Work for Self-satisfaction)

आत्मसन्तोष के लिए कर्म करें

मनुष्य को दूसरों की बात को ध्यानपूर्वक सुनें, किन्तु अपने भीतर स्वयं को सावधान होकर सुनें। आपको अपना कर्म मात्र दूसरों की प्रसन्नता के लिए करने की अपेक्षा अपनी अंतरात्मा की तुष्टि के लिए करना चाहिए। वह व्यक्ति, जो सबको प्रसन्न करना चाहता है, किसीको भी प्रसन्न नहीं करता तथा कुछ भी ठोस उपलब्धि नहीं करता। आपको न तो उन परिस्थितियों की उपेक्षा करनी चाहिए, जिनमें आप कार्य कर रहे हैं और न अन्तरात्मा का निरादर ही करना चाहिए। अन्तःकरण की अदालत के निर्णय स्पष्ट होते हैं, यदि कोई उन्हें जानना चाहे। यदि उचित प्रकार से उनका अनुसरण किया जाए तो वे अपने भीतर दृढ और स्थिर बनाने में बहुत सहायक होंगे।

Work for Self-satisfaction

Hear all others attentively but listen to your Inner Self carefully. You must act more for the satisfaction of your Inner Voice than for the mere pleasure of others.

He who tries to please everyone pleases none and achieves nothing. The Voice of the Inner-Self has to be respected and followed as much as possible. You should neither overlook the circumstances in which you are working, nor should you flout your Inner Self. The judgement of the Court of Conscience is clear if one cares to know them and, if followed properly, they go a
long way to make one strong and stable inside.

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