विश्व हाथी दिवस:-एक राज्य ऐसा भी जिधर हर 3 दिन में होती है 1 हाथी की मौत, म.प्रे ने केंद्र को भेजा प्रोजेक्ट एलीफेंट का प्रस्ताव

विश्व हाथी दिवस:-एक राज्य ऐसा भी जिधर हर 3 दिन में होती है 1 हाथी की मौत, म.प्रे ने केंद्र को भेजा प्रोजेक्ट एलीफेंट का प्रस्ताव

हमारे देश में हाथी को भगवन की तरह पूजा जाता है|इसलिए उनका संरक्षण जरुरी है|उनके संरक्षण करने के लिए ही आज पूरी दुनिया में विश्व हाथी दिवस मनाया जा रहा है। 12 अगस्त 2012 से विश्व हाथी दिवस मनाने की शुरुआत हुई थी जिसका कारण हाथियों के संरक्षण के लिए जनता और समूचे समाज में जागरुकता फैलाना है। धरती के सबसे बड़े इस साकाहारी वन्यपशु का संरक्षण बहुत जरुरी है क्योंकि देश में हाथियों की संख्या तेजी से घटी है। 



उनके शारीर के बहतु से ऐसे अंग है जो लोगों के बहुत काम आते है|यही एक कारण हे के जनता उनको मार देती है और उनके अंगों का व्यापार करती है| अपने देश में ये करना एक तरह से अपराध है| देखा जाये तो एक दशक पहले तक भारत में 1 लाख से ज्यादा हाथी हुआ करते थे लेकिन अब देश में हाथियों की संख्या 27 हजार से भी कम है।

भारत देश में केरल ऐसा राज्य है जिधर सबसे ज्यादा  हाथियों के शिकार और मौत के मामले आते है, यहाँ पर हर 3 दिन में 1 हाथी की मौत हो जाने की बात कही जाती है। हाथियों का संरक्षण करना और उनको शिकारियों से बचाना या फिर उन्हें आबादी वाले इलाकों में घुसने से रोकना आज भी चुनौती है, इसके लिए देश के जंगलों के बीच हाथियों के गलियारे यानि एलीफेंट कॉरीडोर चिन्हित किए गए हैं जिनका संरक्षण जरुरी है।

देश के दिल मध्यप्रदेश की बात करें तो प्रदेश के टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्क में बड़ी संख्या में हाथियों की मौजूदगी है। बांधवगढ़ नेशनल पार्क में दिसंबर 2018 के बाद जंगली हाथियों का झुण्ड पहुंचा था, उनको उधर का माहोल उनके अनुरूप लगा और उन्होंने बांधवगढ़ के जंगलों को अपना आशियाना बना लिया है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की  जनसंख्या सबसे ज्यादा है|जंगली हाथियों की मौजूदगी से ना सिर्फ टाईगर का मूमेंट प्रभावित हो रहा है बल्कि जंगली हाथी भी भटक कर पार्क से लगे गांवों में घुस जाते हैं| इस प्रकार की गतिबिधि आये दिन देखि जा रही है| ऐसे में अब बांधवगढ़ नेशनल पार्क प्रबंधन ने प्रोजेक्ट टाइगर की तरह यहां प्रोजेक्ट एलीफेंट शुरु करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा है, उम्मीद है कि इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के बाद बाघों की तरह हाथियों का भी संरक्षण हो सकेगा।

 


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