दुनिया के कल्याण में ही आपका कल्याण है|

Duniya-29June

समर्पण भाव हो तो काम अच्छा होता है । जो व्यक्ति केवल बौध्दिक स्तर पर अथवा भावावेश के स्तर स्वीकार करके रह नहीं जाता , अपितु वास्तविकता एवं के स्तर पर स्वीकार करता है। अर्थात उसे धारण करता है। उसे जीवन का अंग बना लेता है। तथा वह जीवन भर के लिए धर्म की शरण आ जाता है। शांति -पूर्वक , सुख -पूर्वक एवं जिसमें हमारा तथा अन्यों का भी मंगल हो तो यही धर्म का वास्तव में व्यावहारिक पक्ष है।

Work is good if there is surrender. A person who does not remain at the intellectual level or by accepting the level of emotion, but accepts at the level of reality and. That is, he holds it. Makes him a part of life. And he comes to the shelter of religion for life. Peacefully, happily and in which we and others also have Mars, this is the really practical side of religion.

वास्तव में लाभ व्यवहार से ही होता है। व्यवहारिक पक्ष शील- सदाचार है। मन को वश में करना समाधि है। चित्त को राग- द्वेष विहीन बनाने का काम प्रज्ञा का है। यह ही मन को निर्मल बनाती है। धर्म पलायन के लिए नहीं है। अभिमुख होकर जीने के लिए है।आधा मन यहाँ ,आधा मन वहां ; न यह होगा न वह होगा। इसलिए जब कोई काम करें ,यो सारा ध्यान उस काम में रखें । वह काम बहुत कुशलता से सम्पन्न होगा। कभी धर्म का दिखावा न करें। सारे मंगल , सारे सुख भीतर ही समाये हुवे हैं। अभ्यास करते जाएँ , धर्म को पूर्ण प्राप्त कर मंगल भाव को ग्रहण करें। अपने मंगल में लोक-मंगल समाया हुवा है।
When my son was in Little League, his coach’s simple, much-repeated instructions on pitching technique became etched in my memory. Though this regimented approach produces some rather rigid pitches, it instills at least one important lesson that extends beyond baseball: you hit what you aim at.

We evangelicals are experts at tying ourselves in knots over how to relate to culture. We work ourselves into fits, wrestling down the happy medium between isolation and immersion, monasticism and moral crusading, Quietist aloofness and Constantinian conquest. We know there’s a sweet spot between ignoring our suffering neighbors along the proverbial road to Jericho, heads in the clouds and noses stuffed in our Bibles, and the opposite error of burning heretics at the stake

Environment-Day-Newspuran-29June

लोक -मंगल में अपना मंगल समाया हुवा है। धर्म का जितना-जितना संवर्धन होगा उतना-उतना अधिक मंगल सधेगा। धर्म में सब का मंगल समाविष्ट है।--" मेरे अर्जित पुण्य में , भाग सभी का होय। मेरे सुख में शांति में, भाग सभी का होय। ।

In the Lok Mangal, we have had our Mars. The more enrichment of religion, the more Mars will be maintained. Religion encompasses all mankind .– “In my earned virtue, part belongs to all. In my happiness peace prevails, part belongs to all.”

सबका मंगल ,सबका मंगल सबका मंगल होय रे। । तेरा मंगल , तेरा मंगल , तेरा मंगल होय रे।

 


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