113 ग्राम सभाएं दूसरे वर्ष भी स्वयं से करेंगी तेंदूपत्ता संग्रहण-विपणन


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स्टोरी हाइलाइट्स

पिछली बार तेंदूपत्ता संग्रहण की दर 3 हजार रुपये प्रति मानक बोरा थी जो अब 4 हजार रुपये प्रति मानक बोरा..!!

भोपाल: पेसा नियम प्रभावशील होने के बाद से पिछले साल वर्ष 2023 में आदिवासी बहुल 20 जिलों की 268 ग्राम सभाओं ने तेंदूपत्ता संग्रहण एवं विपणन स्वयं करने की सहमति दी थी और उन्होंने 13 हजार 713 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण किया था। 

इनके विक्रय से कुल 7 करोड़ 19 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त किया था। परन्तु दूसरे वर्ष इन्हीं 20 जिलों की कुल 243 ग्राम सभाओं ने तेंदूपत्ता संग्रहण एवं विपणन की सहमति दी है जो इस साल वर्ष 2024 में 17 हजार 375 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण करेंगी।

इनमें 113 ग्राम सभाएं वे हैं जिन्होंने पिछले साल भी स्वयं से संग्रहण एवं विपणन किया था। पिछली बार तेंदूपत्ता संग्रहण की दर 3 हजार रुपये प्रति मानक बोरा थी जो अब 4 हजार रुपये प्रति मानक बोरा हो गई है।

इन जिलों की ग्राम सभाएं ने दी सहमति:

वर्ष 2024 के संग्रहण एवं विपणन स्वयं से करने के लिये बैतूल जिले की 19, छिंदवाड़ा जिले की 18, मंडला जिले की 16, डिंडोरी जिले की 33, नर्मदापुरम जिले की 5, अनूपपुर जिले की 5, शहडोल जिले की 17, उमरिया जिले की 1, सिवनी जिले की 12, सीधी जिले की 5, बड़वानी जिले की 6, खरगोन जिले की 4, खंडवा जिले की 4, बुरहानपुर जिले की 9, रतलाम जिले की 9, बालाघाट जिले की 64, धार जिले की 5, श्योपुर जिले की 3, अलीराजपुर जिले की 3 तथा झाबुआ जिले की 6 ग्राम सभाओं ने पेसा नियम के तहत सहमति दी है।