भोपाल. बुरहानपुर जिले के नेपानगर पुलिस ने सोमवार रात अज्ञात आरोपितों द्वारा वन चौकी बाकड़ी से लूटे गए हथियार बरामद कर लिए हैं. आरोपी अभी भी फरार है. आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस और वन विभाग के करीब 800 कर्मचारी जंगलों की खाक छान रहे हैं. इस मामले में वन विभाग ने एक रेंजर पुष्पेंद्र जादौन सहित तीन कर्मचारियों को सस्पेंड किया है. 

मंगलवार को देर रात में वन चौकी बाकड़ी में 15-20 अज्ञात बदमाश चौकी के चौकीदार भोला बारेला उसकी पत्नी के साथ मारपीट कर चौकी के शस्त्रागार की अलमारी में रखी 17 बंदूकें और कारतूस लूटकर ले गए थे. चौकीदार भोला बारेला की शिकायत पर अज्ञात आरोपितों के विरुद्ध थाना नेपानगर में केस दर्ज किया गया था.

पुलिस एवं वन विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा ग्राम बाकड़ी, जामपाटी और वन कटाई में शामिल अतिक्रमणकारियों के टपरो पर दबिश दी गई. बुधवार सुबह सर्चिंग आपरेशन के दौरान पुलिस को ग्राम बाकड़ी के पास स्थित तालाब के पास लूटे गए, हथियार मिले जिन्हें आरोपित छोड़कर भाग गए थे.

मौके से मिले हथियारों में 16 नग 12 बोर बंदूक, 1 नग भरमार बंदूक सहित कुल 17 बंदूकें, 12 बोर बंदूक के 652 नग कारतूस व 82 नग चले हुए कारतूस के खोके मिले. जप्त किए गए सामान की कुल कीमत लगभग 4 लाख 45 हजार है. पुलिस द्वारा आरोपितों की तलाश की जा रही है. 

हथियारबंद अतिक्रमणकारियों से दहशत में है वन कर्मी- 

लटेरी घटना के बाद से पूरे प्रदेश के वन कर्मचारियों ने बंदूकें जमा कर दी थी. अतिक्रमणकारियों ने इसका पूरा फायदा उठाते हुए बुरहानपुर के नेपानगर जंगलों को साफ कर अपना आशियाना बनाने में जुड़ गए. बुरहानपुर के अतिक्रमणकारियों के पास तीर-कमान और गोफन है.

अतिक्रमणकारियों ने अक्टूबर से लेकर अब तक निहत्थे वन कर्मचारियों पर लगातार हमले कर रहे हैं.  2 दर्जन से अधिक वन  कर्मचारी घायल हो चुके हैं. बुरहानपुर के डीएफओ प्रदीप मिश्रा स्वयं बताते हैं कि हथियारबंद अतिक्रमणकारियों की संख्या 300 से 400 के करीब है.

उन से निपटने के लिए हमारा अमला असहाय है. यहां तक कि पुलिस अमला भी उनसे निपट नहीं पा रहा है. जबकि कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी टास्क फोर्स कमेटी की बैठकों में अतिक्रमणकारियों के उत्पात का मामला उठता है पर अभी तक कड़े एक्शन नहीं हो पाए हैं. घटना घटित होने के बाद केवल रस्म अदायगी अदा की जा रही है. 

डेढ़ दशक से नहीं हुई अतिक्रमण माफिया के खिलाफ ठोस कार्यवाही- 

बुरहानपुर वन मंडल के नेपानगर के जंगलों में अतिक्रमण माफिया की दहशत डेढ़ दशकों से है. इंडियन दशकों में वन विभाग के शीर्षस्थ अधिकारी अतिक्रमण माफिया से निपटने के लिए कोई एक्शन प्लान तैयार नहीं कर पाए. इसकी वजह भी स्पष्ट है कि जब कोई तेज-तर्रार अफसर अतिक्रमण माफिया से निपटने के लिए एक्शन मूड में आता है तब उसे  राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते हटा दिया जाता है.

यानी अतिक्रमण माफिया को राजनीतिक संरक्षण मिलने की वजह से वन विभाग का फ्रंट लाइन वर्कर लगातार पीटता हुआ आ रहा है. आज भी वह पिटता हुआ आ रहा है.फॉरेस्ट के आला अफसर हो या फिर जिला और पुलिस प्रशासन के अधिकारी तमाशबीन बने हुए हैं.