MP अनुपयोगी संपत्तियों से पीछा छुड़ाने की तैयारी, एक कंपनी बनेगी जो यह मामले सुलझाएगी

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स्टोरी हाइलाइट्स

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भोपाल

राज्य सरकार अपनी उन संपत्तियों से पीछा छुड़ाना' चाहती है जो लगभग अनुपयोगी है और इसके चलते कई बार सरकार को विभिन्न परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। मसलन उत्तर प्रदेश के झांसी में लोक निर्माण भाग का विश्राम गृह है तो केरल स्थित एक बागान समेत कई ऐसे दायित्व हैं। लिहाजा अनुपयोगी परिसंपत्तियों के प्रबंधन के लिए अब कंपनी बनाने की फाइलें चल पड़ी हैं। इसके लिये बना लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग अभी मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के माध्यम से यह काम करा रहा है। चूंकि इस निगम के पास सड़क परियोजनाओं के साथ भवन निर्माण निगम का काम भी आ गया है। लिहाजा इसे देखते हुए विभाग ने कंपनी बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है, इसे अंतिम निर्णय के लिए कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। यह कंपनी शासनन या सार्वजनिक उपक्रम की परिसंपत्तियों का प्रबंधन करेगी और अनुपयोगी परिसंपत्तियों को नीलाम किया जाएगा।

जानकारी के मुताबिक विभाग ने उन सभी परिसंपत्तियों को नीलाम करने की कार्य योजना बनाई है, जो अनुपयोगी हैं। पिछले दिनों विभागों से इनकी जानकारी मांगी गई थी। इसके तहत अब तक 377 परिसंपत्तियों

की जानकारी पोर्टल में दर्ज की जा चुकी है। इनमें से विभाग ई-टेंडर के माध्यम से लगभग 30 परिसंपत्तियों को नीलाम कर चुका है। इससे सरकार को 150 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। अभी विभाग के लिए पूरा काम सड़क विकास निगम कर रहा है लेकिन इससे उसका कार्य प्रभावित हो रहा है। इसे देखते हुए ही परिसंपत्ति मौद्रीकरण एवं प्रबंधन कंपनी बनाने का विचार आया है। यह कंपनी परिसंपत्तियों से जुड़े विवाद को भी देखेगी।

बिखरी संपत्तियां और विवाद

बताते हैं कि लोक निर्माण विभाग का झांसी में विश्राम गृह है। इससे 15-16 एकड़ भूमि लगी हुई है। इस पर कब्जा तो लोक निर्माण विभाग का है लेकिन दस्तावेजों में स्वामित्व उत्तर प्रदेश शासन का है। इस मुद्दे को सुलझाने के लिए लोक निर्माण विभाग कई पत्र भी लिख चुका है लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ है। इसी तरह केरल में सरकार के नाम पर एक फार्म है। इस भूमि को भी नीलाम करने पर विचार चल रहा है। वहीं, परिवहन निगम की सीधी, दमोह, और इंदौर स्थित परिसंपत्ति को नगरीय निकायों को सौंपा गया है।