कृषि कानून को वापस लेने के बाद भी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का दावा है कि उसने किसानों के हित में अब तक अनेक कार्य किए हैं कृषि कानूनों को भी अच्छी मंशा से लाया गया था सरकार द्वारा जारी एक लिस्ट के मुताबिक एनडीए सरकार में किसानों के लिए काफी कार्य किए गए आप भी देखिए नरेंद्र मोदी सरकार ने किसानों के हित में किए गए किन कार्यों का ब्यौरा दिया है
- किसान सम्मान निधि - अब तक 10 किस्तों में 1.56 लाख करोड़ रुपए। 10 करोड़ किसान लाभान्वित
- कृषि इंफ्रा स्ट्रक्चर - 1 लाख करोड़ रुपए
- प्रति बोरी डी एपी पर सब्सिडी - 1200 रुपए
- गैर-यूरिया उर्वरक की कीमत में कमी - प्रति बोरी 50 रुपये
- ई - नाम - करीब पौने दो करोड़ किसान इस ऑनलाइन मंडी से रजिस्टर्ड हो चुके हैं।
- मोदी सरकार में रबी और खरीफ फसलों को एम एसपी में तीन बार बढ़ोत्तरी। स्वामीनाथन कमिटी की सिफारिशें लागू।
- गन्ना की एफ आरपी बढ़ाई गई
- गन्ना किसानों को बकाए का भुगतान
- स्वायल हेल्थ कार्ड - 14 करोड़ किसानों को जारी।
- किसान मान-धन योजना - लघु एवं सीमांत किसानों को पेंशन की व्यवस्था
- प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान - कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए ‘प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान’ (PM-AASHA) के तहत राज्यों को एक से ज्यादा स्कीमों का विकल्प मिला है। अगर, बाजार की कीमतें समर्थन मूल्य से नीचे आती हैं तो सरकार एमएसपी को सुनिश्चित करेगी और किसानों के नुकसान की भरपाई करती है। यह स्कीम राज्यों में तिलहन उत्पादन के 25% हिस्से पर भी लागू है।
- बीज से बाजार तक - किसानों को सशक्त करने के लिए ‘बीज से बाजार तक’ मोदी सरकार की एक अनुपम पहल है।
- किसान संपदा योजना - किसान संपदा योजना से सप्लाई चेन को मजबूती
- मोदी सरकार प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के जरिए खेत से लेकर बाजार तक पूरी सप्लाई चेन को मजबूत कर रही है।
- मोदी सरकार ने अब 70,000 करोड़ रुपये से अधिक की खाद सब्सिडी को सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर करने का निर्णय लिया है।
- हर घर तक बिजली पहुंचाने के बाद मोदी सरकार अब हर खेत तक 24 घंटे बिजली पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है।
- अब किसानों को 3 लाख रुपये तक के कर्ज लेने की प्रक्रिया में कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। अब किसानों को प्रोसेसिंग, इंस्पेक्शन फीस या सर्विस चार्ज नहीं देना होगा।
धान की खरीदी - खरीफ विपणन अवधि (केएमएस) 2021-22 के दौरान 05.10.2021 तक 563.60 करोड़ रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) परकुल 2,87,552 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है, जिससे 29,907 किसानों को लाभ हुआ है। हरियाणा में कुल 1,46,509 मीट्रिक टन और पंजाब में 1,41,043 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है।
दिनांक 05.10.2021 तककुल 894.24 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी)धान (खरीफ फसल 718.09 लाख मीट्रिक टन और रबी फसल 176.15 लाख मीट्रिक टनशामिल) की खरीद के साथ खरीफ 2020-21 की अवधि में धान की खरीदलगभग समाप्त हो गई है।पिछले साल की इसी अवधि में 768.70 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) धान की खरीद की गई थी।
खरीफ विपणन अवधि (केएमएस) 2020-21 के दौरान 1,68,832.78 करोड़ रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की गई खरीद से लगभग 131.14 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं।इस अवधि के दौरान हुई धान की खरीद 2019-20 केखरीफ विपणन अवधि (केएमएस)के पिछले उच्च स्तर 770.93 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) को पार करते हुए अबतक के सबसेउच्च स्तर पर पहुंच गई।
गेहूं की खरीद - रबी विपणन सत्र 2021-22 के समापन के बाद 433.32 लाख मीट्रिक टन गेहूं (wheat) की खरीद हुई है। यह अपने आप में रिकॉर्ड है। पिछले साल यानी 2020-21 में 389.92 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई थी। केंद्र सरकार ने बताया कि इस साल 49.15 लाख किसानों को गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मिला है। इन किसानों को रिकॉर्ड 85,581.39 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, वो भी सीधे उनके बैंक अकाउंट में।
*स्वामीनाथन आयोग की जिन सिफारिशों को कांग्रेस सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था, मोदी सरकार ने उसकी सिफारिशों को स्वीकार किया*। उत्पादन लागत का न्यूनतम 1.5 गुना एमएसपी निर्धारित करने की घोषणा की। इसके बाद एमएसपी में लगातार वृद्धि करते हुए मोदी सरकार ने इसे आगे जारी रखने का संकल्प भी व्यक्त किया है। आइए देखते हैं मोदी सरकार किस तरह किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को पूरा करने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठा रही है।
*मोदी सरकार में पहली बार*
- मोदी सरकार ने ‘एक देश, एक कृषि बाजार’ बनाने का मार्ग प्रशस्त किया।
- किसानों को अपनी फसल कहीं पर, किसी को भी बेचने की आजादी मिली।
- आवश्यक वस्तु अधिनियम में ऐतिहासिक संशोधन कर कृषि उपजों को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटा दिया गया।
- केंद्रीय बजट 2018-19 में उत्पादन लागत का न्यूनतम 1.5 गुना एमएसपी निर्धारित करने की घोषणा की गई।
- 7 अगस्त, 2020 को देवलाली से दानापुर तक पहली किसान रेल की शुरुआत हुई।
- केंद्रीय बजट 2020-21 में किसान कृषि उड़ान योजना की घोषणा की गई।
- अक्टूबर 2017 में किसानों को दी जाने वाली उर्वरक सब्सिडी को डीबीटी के दायरे में लाया गया।
- वर्ष 2017 में मोदी सरकार ने ‘’पेड़’’ की परिभाषा से बांस को हटाने के लिए कानून में संशोधन किया।
- पहला e-NAM अंतरराज्यीय व्यापार आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच 19 जनवरी, 2019 से शुरू हुआ।
- वर्ष 2016 में मोदी सरकार ने हर साल 15 अक्टूबर को राष्ट्रीय महिला किसान दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया।
- 2016 में कृषि मंत्रालय का नाम बदलकर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय किया गया।
- 19 फरवरी, 2015 को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसा भारत का अनोखा कार्यक्रम शुरू किया गया।
*कोविड-19 संकट में बनी मोदी सरकार*
- कोविड-19 संकट से निपटने के लिए आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत कृषि क्षेत्र के लिए 1.63 लाख करोड़ रुपये की घोषणा की गई।
- कोविड-19 संकट आने के बाद 3 करोड़ किसानों को 4.22 लाख करोड़ रुपये के फसल ऋण पर ब्याज में छूट दी गई।
- किसानों के फसल ऋण पर ब्याज में छूट की समय सीमा को बढ़ाकर 31 अगस्त, 2020 तक किया गया।
- इसके तहत फसल ऋण पर ब्याज में 2 प्रतिशत और समय पर भुगतान करने पर 3 प्रतिशत की छूट दी गई।
- किसानों को खरीफ के दौरान बुवाई जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंकों ने 70.32 लाख किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जारी किए।
- किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए 62,870 करोड़ रुपये का ऋण भी किसानों को दिया गया।
- माइक्रो फूड इंटरप्राइज के लिए 10,000 करोड़ रुपये की घोषणा की गई। इससे खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र की छोटी इकाइयों को फायदा होगा।
- ऑपरेशन ग्रीन के दायरे में सभी फल और सब्जियों को लाया गया। इस योजना के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया।
- ऑपरेशन ग्रीन योजना के तहत सभी फल सब्जियों के परिवहन और स्टोरेज पर 50-50 प्रतिशत सब्सिडी की घोषणा की गई।
- कोविड-19 महामारी के दौरान किसानों से रिकॉर्ड 382 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई। इससे 42 लाख किसान लाभान्वित हुए।
- एमएफपी योजना के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत लघु वन उपजों की भी 79.42 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड खरीद हुई।
*आत्मनिर्भर बनते किसान*
- कृषि सेक्टर के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के एग्री-इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड की घोषणा की गई।
- नाबार्ड के जरिए अतिरिक्त आपातकालीन कार्यशील पूंजी सुविधा के रूप में 30,000 करोड़ रुपये देने की घोषणा की गई।
- कृषि क्षेत्र को 2 लाख करोड़ रुपये का ऋण प्रोत्साहन देने के लिए मिशन-मोड में अभियान चलाया जा रहा है।
- आवश्यक वस्तु अधिनियम में ऐतिहासिक संशोधन कर खाद्य वस्तुओं को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटाया गया।
- 24 फरवरी, 2019 को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की शुरुआत की गई।
- किसान सम्मान निधि के तहत 10.6 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को 1,11,000 करोड़ रुपये बैंक खाते में भेजे गए।
- 12 सितंबर, 2019 को पीएम किसान मानधन योजना शुरू की गई। किसानों को प्रति माह 3,000 रुपये पेंशन की सुविधा है।
- सितंबर 2020 तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 9 करोड़ से अधिक किसानों ने पंजीकरण कराया।
- मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को अब स्वैच्छिक बना दिया है।
- पूर्वोत्तर राज्यों के लिए प्रीमियम सब्सिडी में केन्द्रीय सब्सिडी का हिस्सा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत किया गया।
- 33 प्रतिशत और उससे अधिक फसल के नुकसान की स्थिति में किसानों को मदद मिलेगी।
- मोदी सरकार कृषि के पारंपरिक तरीके को फिर से अपनाने के लिए जीरो बजट खेती को प्रोत्साहन दे रही है।
- मोदी सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए पूरी तरह नीम कोटिंग यूरिया के इस्तेमाल की मंजूरी दी।
- मोदी सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए ‘ऑपरेशन ग्रीन्स’ की शुरुआत की।
- औषधीय जड़ी बूटी की खेती को प्रोत्साहन के लिए 4,000 करोड़ रुपये के राष्ट्रीय औषधीय पौध कोष की घोषणा की गयी।
*हर खेत को पानी*
- हर खेत को पानी उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की शुरुआत 2015 में की गई।
- कुसुम योजना के तहत साल 2022 तक देश में तीन करोड़ सिंचाई पंपों को सौर ऊर्जा से चलाने का लक्ष्य रखा गया है।
- मोदी सरकार ने अगले 5 वर्षों में सूक्ष्म सिंचाई के अंतर्गत 100 लाख हेक्टेयर भूमि कवर करने का लक्ष्य रखा है।
- वर्ष 2019-20 में ड्रिप व स्प्रिंकलर सिस्टम अपनाने से 11 लाख किसानों को लाभ हुआ।
*मृदा स्वास्थ्य सुधार*
- 19 फरवरी, 2015 को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसा भारत का अनोखा कार्यक्रम शुरू किया गया था।
- सितंबर 2020 तक 22.4 करोड़ किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किया गया।
- हर दो साल में मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी करने से मिट्टी के पोषण की कमियों को दूर किया जा सकेगा।
- इससे पानी व केमिकल की बचत होगी और मृदा स्वास्थ्य बढ़ाने में भी कामयाबी मिलेगी।
*कृषि-उद्यमिता को बढ़ावा*
- 10 हजार नए कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की स्थापना से किसान समूहों के साथ एक नया आयाम जुड़ा है।
- देश के 60 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत हैं, जो इन एफपीओ के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएंगे।
- ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना के तहत बागवानी उत्पादों के लिए क्लस्टर आधारित रणनीति अपनायी गई है।
- कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में इनोवेशन व तकनीक के उपयोग के लिए स्टार्ट-अप्स और कृषि-उद्यमिता पर जोर दिया जा रहा है।
- वित्त वर्ष 2020-21 में कृषि के क्षेत्र में 112 स्टार्ट-अप्स को 1,185.90 लाख रुपये की सहायता किस्तों में दी जाएगी।
*महत्वपूर्ण तथ्य*
- मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए पूरी तरह से अलग फीडर तय किया है, जिससे किसानों को 24 घंटे बिजली मिल सके।
- मोदी सरकार में सिंद्री, गोरखपुर और बरौनी के उर्वरक कारखानों को फिर से खोला गया।
- उर्वरक की बिक्री में साल-दर-साल लगभग 98 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो कृषि क्षेत्र में आ रही मजबूती को दर्शाता है।
- 6 साल पहले जहां देश में सिर्फ एक केंद्रीय कृषि विश्विद्यालय था, वहीं मोदी सरकार में इसकी संख्या बढ़कर तीन हो गई है।
- मोदी सरकार ने 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर बंजर जमीन को दुरुस्त करने का लक्ष्य तय किया है।
- किसानों को सशक्त करने के लिए ‘बीज से बाजार तक’ मोदी सरकार ने एक अनोखी पहल की।
- बजट 2018-19 में गोबर-धन यानि गैलवनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्स योजना की घोषणा की गई।
मुफ्त राशन: 8 महीने तक मार्च से नवंबर तक देश के 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराने की वयवस्था की गई। 8 करोड़ माताओं को तीन गैस सिलिंडर मुफ्त।
*तकनीक से खेती करना हुआ आसान*
- कृषि उत्पादों के विपणन को आसान बनाने के लिए 14 अप्रैल, 2016 को e-NAM व्यापार पोर्टल की शुरुआत की गई।
- सितंबर 2020 तक 1.67 करोड़ से अधिक किसानों ने e-NAM पर पंजीकरण कराया।
- अप्रैल 2020 में कृषि उत्पादों के परिवहन में सुगमता लाने के लिए किसान रथ मोबाइल एप लांच किया गया।
- सीएचसी-फॉर्म मशीनरी मोबाइल एप किसानों को किराए पर कृषि मशीनरी और उपकरण प्राप्त करने में मदद करता है।
- एग्री मार्केट एप से फसलों की कीमतों के बारे में और फसल बीमा एप से फसल बीमा की जानकारी मिलती है।
- किसान सुविधा मोबाइल एप से किसानों को मौसम, कीमत, बीज, उर्वरक, कीटनाशक आदि की जानकारी मिलती है।
- मोदी सरकार ने किसानों को दिए जाने वाले उर्वरक की सब्सिडी को डीबीटी के दायरे में ला दिया।
- पहले चरण में पीओएस मशीनों के माध्यम से दर्ज खुदरा बिक्री के अंकड़ों की जांच के बाद कंपनियों को सब्सिडी ट्रांसफर की जा रही है।
- मोदी सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से देश के किसानों की तकदीर बदलने की तैयारी कर रही है।
*बजट 2020 में किसानों के लिए खास घोषणाएं*
- 2020-21 के लिए 15 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य तय।
- सार्वजनिक और निजी भागीदारी के माध्यम से भारतीय रेल द्वारा किसान रेल सेवा शुरू करने का प्रस्ताव।
- राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों हवाई मार्गों पर इस सेवा का संचालन।
- पूर्वोत्तर ओर जनजातीय क्षेत्रों के जिलों को कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलना।
- बागवानी क्षेत्र में ‘एक उत्पाद, एक जिला’ की नीति
- सौर-पंपों तथा सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना। पीएम-कुसुम का विस्तार। योजना के तहत 20 लाख किसानों को सौर ऊर्जा पंप लगाने में मदद। अतिरिक्त 15 लाख किसानों को ग्रिड से जुड़े पंप सैटों को सौर ऊर्जा चलित बनाने में मदद करना।
- दूध प्रसंस्करण क्षमता को वर्ष 2025 तक 53.5 मिलियन एमटी से दोगुना कर 108 मिलियन एमटी के स्तर पर पहुंचाया जाएगा।
- अटल भूजल योजना का शुभारंभ - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर, 2019 को दिल्ली के विज्ञान भवन में अटल भूजल योजना की शुरुआत की। 6 हजार करोड़ रुपये की यह योजना 8 हजार 350 गांवों में शुरू की गई है। इस योजना के जरिए भूजल को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।
*श्वेत क्रांति की बढ़ी रफ्तार*
- पशुपालकों और डेयरी सेक्टर के विकास के लिए 15 हजार करोड़ रुपए का एक विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर फंड बनाया गया है।
- 5 करोड़ डेयरी किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड्स (केसीसी) अभियान की शुरुआत की गई।
- पीएम मोदी ने किसानों को पशुधन के लिए ई-मार्केटप्लस उपलब्ध कराने के लिए ई-गोपाला मोबाइल एप का लॉन्च किया।
- 50 करोड़ से ज्यादा पशुधन को खुरपका और मुंहपका बीमारियों से मुक्ति के लिए मुफ्त टीकाकरण अभियान शुरू किया गया।
- देसी नस्ल की गायों के विकास के लिए मिशन गोकुल शुरू किया गया है।
- डेयरी किसानों के लोन या सब्सिडी पर ब्याज छूट को 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।
*मधुमक्खी पालन*
- मोदी सरकार ने मधुमक्खी पालन के लिए 500 करोड़ रुपये का आवंटन किया।
- एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र, विपणन और भंडारण केंद्र से संबंधित अवसंरचनाओं का विकास किया जाएगा।
- मधुमक्खी-पालकों के रूप में महिलाओं पर विशेष फोकस करते हुए क्षमता निर्माण को गति प्रदान की जा रही है।
- मोदी सरकार ने नेशनल बी-कीपिंग एंड हनी मिशन को मंजूरी दी, इससे 10 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है।
- शहद उत्पादन में लगभग 60 प्रतिशत और निर्यात में दोगुने से अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
*नीली क्रांति*
- 10 सितंबर, 2020 को पीएम मोदी ने 20,050 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) का शुभारंभ किया।
- इससे मछली उत्पादकों को नया इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक उपकरण और नया मार्केट भी मिलेगा।
- 2013-14 से 2018-19 के बीच मत्स्य उत्पादन 79 लाख टन से बढ़कर 134.2 लाख टन पहुंचा।
- पिछले पांच वर्षों में समुद्री उत्पाद के निर्यात में 54 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
- बजट 2020 में 2024-25 तक मत्स्य निर्यात को एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने के लक्ष्य की घोषणा की गई।
- मछुआरों की आय और मछली का उत्पादन दोगुना करने के लिए मत्स्यपालन विभाग बनाया गया।
*किसान रेल*
- 7 अगस्त, 2020 को देवलाली से दानापुर तक पहली किसान रेल प्रारंभ की गई।
- 9 सितंबर,2020 को देश की दूसरी व दक्षिण भारत की पहली किसान रेल अनंतपुर (आंध्र प्रदेश) से दिल्ली के लिए रवाना हुई।
- किसान ट्रेन कम समय में सब्जियों, फलों जैसे जल्द खराब होने वाले कृषि उत्पादों को बाजार में लाने में मदद करेगी।
*किसान उड़ान*
- केंद्रीय बजट 2020 में किसान कृषि उड़ान योजना की घोषणा की गई।
- किसानों की फसलों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए विशेष हवाई यात्रा की व्यवस्था की जाएगी।
- जल्दी ख़राब होने वाले खाद्य सामग्री जल्द बाजार में पहुंच सकेंगी। किसानों को फसल के अच्छे दाम प्राप्त होंगे।
*किसान चैनल*
- 26 मई, 2015 को किसानों के लिए समर्पित देश का पहला टीवी चैनल ‘डीडी किसान’ का शुभारंभ हुआ।
- चैनल द्वारा किसानों को नई तकनीकों और शोधों के बारे में सही और सीधी जानकारी पहुंचाई जा रही है।
- केंद्रीय कृषि मंत्री ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के सहकार कॉपट्यूब चैनल का शुभारम्भ किया।