पालक महासंघ ने लिखा सीएम व स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र, कहा- आदेश स्पष्ट नहीं..


स्टोरी हाइलाइट्स

शुक्रवार को पालक महासंघ मप्र ने इसके विरोध में मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री के नाम पत्र लिखकर आदेश स्पष्ट नहीं होने और स्कूलों की मनमानी शुरू होने की बात कही है।

कक्षाओं का संचालन और स्कूली फीस के मामले ने पकड़ा तूल....

भोपाल:

स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के स्कूलों में 100 फीसदी क्षमता के साथ कक्षाओं के संचालन के आदेश जारी करने के साथ ही स्कूल फीस को लेकर भी आदेश जारी कर दिए हैं। विभाग के इन आदेशों के बाद जहां स्कूल संचालक खुश हैं, तो वहीं अभिभावक इसका विरोध कर रहे हैं। 

शुक्रवार को पालक महासंघ मप्र ने इसके विरोध में मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री के नाम पत्र लिखकर आदेश स्पष्ट नहीं होने और स्कूलों की मनमानी शुरू होने की बात कही है।

मप्र पालक महासंघ ने कहा है कि प्रदेश सरकार द्वारा उक्त आदेशों को जारी करने से पहले अभिभावकों के पंजीकृत संगठनों से राय तक नहीं ली गई है, जिससे अभिभावकों में असंतोष है। वर्ष 2021-22 में भी स्थितियां वर्ष 2020-21 के अनुरूप ही हैं और शिक्षण के अतिरिक्त कोई अन्य गतिविधियां भी संचालित नहीं हो रही हैं। इसके साथ ही अभिभावक भी देश की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अन्य गतिविधियों के संचालन के इच्छुक नहीं हैं। 

शासन के आदेश में भी अन्य गतिविधियों के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है, जिसका फायदा उठाकर कई निजी स्कूल सभी मदों में फीस लेने के लिए दबाव बना रहे हैं। विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश के पालन में अभिभावकों को व्यवहारिक परेशानियां आ रही हैं। 

आदेश के अनुसार स्टूडेंट अभिभावकों की सहमति से ही स्कूल जा सकेंगे, अगर अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल न भेजना चाहें तो उनके लिए पढ़ाई की क्या व्यवस्था होगी और फीस किस तरह की ली जाएगी, यह स्पष्ट नहीं है। स्कूलों द्वारा आदेश का आशय इस प्रकार लिया जा रहा है कि वह मनमाने ढंग से बच्चों को स्कूल आने के लिए बाध्य कर रहे हैं तथा ऑनलाइन क्लास मनमाने ढंग से बंद कर परीक्षा स्कूल में ही ऑफलाइन लेने के लिए बाध्य कर रहे हैं। जिससे बच्चे का भविष्य दांव पर है।

अभिभावक भयभीत, नहीं ली राय:

महासंघ ने कहा है कि वर्तमान में प्रदेश में कोरोना से पीड़ितों की संख्या में इजाफा हो रहा है, साथ ही पूरे देश में स्कूलों में भी छात्रों के संक्रमित होने की खबरें निरंतर आ रही है। जिसे देखते हुए अभिभावक भयभीत है।

विभाग ने की कोर्ट तक की तैयारी:

अभिभावक का विरोध देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने अपना पक्ष मजबूत करने की तैयारियां शुरू कर दी है। मामले में अभिभावकों की और से कोर्ट जाने की आशंका के चलते लोक शिक्षण संचालनालय भी हाई कोर्ट में केविएट दायर कर रहा है। इसके साथ ही केविएट सूचना भी जारी करते हुए लोक शिक्षण संचालनालय ने कहा है कि उक्त आदेश के विरूद्ध अशासकीय विद्यालय संगठन, अभिभावक, स्वयंसेवी संस्थाएं न्यायालय में वाद प्रस्तुत कर सकती हैं। इसके लिए विभाग की ओर से न्यायालय में केविएट दायर की जा रही है। 

राज्य शासन के उक्त आदेश के विरुद्ध विभिन्न संस्थाओं, अभिभावकों, पालकों एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा न्यायालय में वाद दायर होने की स्थिति में राज्य शासन पक्ष को सुनवाई का अवसर देने के बाद ही अंतरिम आदेश पारित हो।

दो दिन में 54 स्कूल बसें पहुंचीं, जांच में दो स्कूल बसों को अनफिट पाया गया.

भोपाल में पूरी क्षमता से स्कूल खुलने के बाद फिटनेस के लिए आरटीओ पहुंचने लगीं स्कूल बसें..

कोरोना से राहत मिलने के बाद शासन के निर्देश पर पूर्ण क्षमता के साथ स्कूल अब पुन: खुल गए हैं। इससे स्कूल बसें चलाने की जरूरत भी महसूस होने लगी है। ऐसे में परिवहन अधिकारियों के निर्देश पर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में स्कूल बसों की फिटनेस शुरू हो गई है। राजधानी भोपाल में बीते दो दिनों में 54 स्कूल बसें आरटीओ में फिटनेस कराने के लिए आई। इनमें से दो बसें अनफिट निकलीं। बाकी बसों को फिटनेस सर्टिफिकेट प्रदान किया गया।

यहां पर यह बता दें कि उप परिवहन आयुक्त अरविंद सक्सेना के निर्देश पर फिटनेस शाखा के अधिकारियों व कर्मचारियों को स्कूल बसों की फिटनेस जांच कराने के काम में लगाया गया है। परिवहन विभाग ने कुछ दिनों पहले आदेश जारी करते हुए कहा था कि प्रदेश सरकार ने स्कूल खोलने की अनुमति दे दी है, लेकिन अभी तक स्कूलों व बस संचालकों ने अपनी बसों की फिटनेस नहीं कराई है। 

बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी स्कूल बस संचालक बसों की फिटनेस कराएं। बस संचालकों को पांच दिसंबर से पहले फिटनेस जांच कराने के लिए निर्देशित किया गया है।

ऐसे स्कूल बस मालिक जो बसों की फिटनेस जांच नहीं कराते हैं, उनके परमिट निरस्त कराने के आदेश हैं। जो दो बसें अनफिट की गई हैं, उनमें से किसी में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं थे। आपातकालीन नंबर भी नहीं लिखा था। आरटीओ संजय तिवारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन नहीं करने वाली बसों का अनफिट किया जाता है। जब तक अनफिट बसों को फिट नहीं किया जाएगा, जब तक बसों के मालिक खामियों को पूरा करने के प्रति उद्यत नहीं होते।