अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने अपनी विशेषज्ञ समिति से दोबारा नए कोर्सों में बाजार के अनुरूप बदलाव के साथ इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने के मसले पर मार्गदर्शन मांगा है। फिलहाल प्रदेश में इंजीनियरिंग के करीब 150 और फामेसी के 114 कॉलेज संचालित हैं। अभी इंजीनियरिंग और फामेसी कॉलेजों को मान्यता देने पर रोक लगी हुई है। नए कालेजों की गाइडलाइन तैयार कर रही है। उसने शर्तों पर राज्य सरकार को इंजीनियरिंग और फामेसी कॉलेज खोलने की इजाजत दी है।

ऐसे में सत्र 2022-23 से कोर्सों में बदलाव कर नई गाइडलाइन के साथ नए इंजीनियरिंग और फामेसी कॉलेज खुलने की संभावनाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के ताबिक, इंजीनियरिंग कॉलेजों में बीटेक प्रोग्राम में कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल कोर्स में बदलाव हो सकता है। इसके लिए भी विशेषज्ञ कमेटी रिपोर्ट तैयार कर रही है। इसमें नई शिक्षा नीति के तहत कुछ कोर्स शामिल किए जाएंगे। इन कोर्स में जो विषय मार्केट डिमांड के आधार पर प्रचलन या मांग में नहीं होंगे, उन्हें हटाया जा सकता है।

एआईसीटीई भोपाल रीजन के रीजनल ऑफिसर डॉ. सीएस वर्मा का कहना है कि इंजीनियरिंग में बाजार की मांग के अनुसार तैयार किए गए कोर्सों में छात्रों का रुझान बरा है। उसी आधार पर अगले सत्र से कॉलेज खोलने के लिए कमेटी से राय मांगी गई है।

2019 में यह भेजा था सुझाव

दरअसल, देश में इंजीनियरिंग की घटती मांग को देखते हुए विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि सत्र 2020 में नए इंजीनियरिंग कालेजों में बीटेक प्रोग्राम में दाखिले नहीं हों। सत्र 2019 भी उन्हीं इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले की अनुमति दी जाए, जिनकी मीट पिछले सालों में भरती रही हैं।

कमेटी ने पारंपरिक के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन लर्निंग, रोबोटिक जैसे बाजार की मांग वाले या रोजगार देने वाले कोर्स शुरू करने की सिफारिश की थी। एआईसीटीई अधिकारियों के मुताबिक, समिति के सुझाव पर 2021 में किसी भी नए इंजीनियरिंग कॉलेज को प?ई की अनुमति नहीं दी गई थे। हालांकि समिति ने दो साल बाद डिमांड के आधार पर रिव्यू की सिफारिश भी की थे। इसी के चलते दोबारा सुझाव मांगे जा रहे हैं।