MP Election 2023: मध्यप्रदेश में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में प्रदेश की सियासी सरगर्मियां काफी तेज़ हैं. भाजपा की तरफ से एक के बाद एक कई चौकाने वाले ख़ुलासे भी सामने आ रहे हैं. पहली बार चुनाव से करीब तीन महीने पहले ही भाजपा ने 39 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर सभी को हैरान कर दिया था.
अब भाजपा ने अपनी दूसरी सूची भी जारी कर दी है. इस सूची में तो और भी कई चौकाने वाले क़दम उठाये गए हैं. इसमें भाजपा ने तीन केंद्रीय मंत्रियों सहित सात सांसदों को चुनावी मैदान में उतारा है. इस सूची में भी 39 प्रत्याशी घोषित किये गए हैं. इस सूची में जिन सांसदों का नाम शामिल हैं, उनमें मुरैना की दिमनी सीट से नरेंद्र सिंह तोमर, सतना से गणेश सिंह, सीधी से रीती पाठक, जबलपुर पश्चिम से राकेश सिंह, गाडरवारा से उदय प्रताप सिंह, नरसिंहपुर से प्रहलाद पटेल और निवास सीट से फग्गन सिंह कुलस्ते शामिल है.
वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय को भी इंदौर की 1 नंबर सीट से मैदान में उतारा गया है. हालांकि, इसमें ऐसी और भी कई सीटें शामिल है, जहाँ भाजपा को लंबे समय से जीत हासिल नहीं हुई है. ऐसी ही एक भिंड जिले की लहार विधानसभा सीट हैं. जहां करीब 1990 से भाजपा का खाता नहीं खुला है.
गोविन्द सिंह के गढ़ में भाजपा की तैयारी-
ये इलाका डॉ. गोविन्द सिंह का गढ़ माना जाता हैं. नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविन्द सिंह 1990 में एक बार जनता दल और लगातार 6 बार से कांग्रेस के टिकट पर जीत का परचम लहरा रहे हैं. ऐसे में इस बार 2023 के चुनावी रण में भाजपा ने यहां से अमरीश शर्मा गुड्डू को मैदान में उतारा है. भाजपा इस बार लहार सीट को फ़तह करने की पूरी तैयारी में हैं. ऐसे में सवाल ये हैं पार्टी ने अमरीश शर्मा पर भरोसा क्यों जताया, जानिए?
दरअसल, पिछले 2018 विधानसभा चुनाव के समय अमरीश शर्मा गुड्डू ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन, उन्हें काफी ज्यादा वोट हासिल हुए थे. हार के बाद दो साल पहले ही उन्होंने भाजपा का फिर से दामन थामा हैं.
अमरीश शर्मा गुड्डू के भाजपा में आने से स्थानीय लेवल पर आपसी गुटबाजी पूरी तरह से शांत हो गई और पार्टी को काफी मजबूती भी मिली. ऐसे में पार्टी को उम्मीद है कि उन्हें चुनावी मैदान में उतारने से बसपा का वोट बैंक भी गड़बड़ा जायेगा. जिसका फ़ायदा सीधे तौर पर भाजपा को ही मिलेगा.
इससे पहले 2003 में मिली थी हार-
हालांकि, ये बात अलग है कि 2003 में अमरीश शर्मा गुड्डू भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में उभर कर सामने आए थे. इस दौरान उन्हें 2003 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर से लहार का प्रत्याशी भी बनाया गया था. लेकिन, डॉ. गोविंद सिंह के सामने उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.
उसके बाद से ही लगातार क्षेत्र में भाजपा के लिए सक्रिय रहे अमरीश शर्मा गुड्डू को 2008 और 2013 के चुनाव में मौका नहीं दिया गया. आखिरकार, 2018 के विधानसभा चुनाव में भी उनका पत्ता काटा तो वह भाजपा का दामन छोड़ बसपा के हाथी पर सवार हो गए थे. बसपा प्रत्याशी बनकर चुनाव भी लड़ा लेकिन उन्हें फिर से डॉ. गोविंद सिंह के सामने शिकस्त झेलनी पड़ी.
अब एक बार फिर से अमरीश शर्मा गुड्डू 2023 में भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे हैं. ऐसे में देखना ये होगा की इस बार भी अमरीश शर्मा गुड्डू डॉ. गोविंद सिंह का किला भेद पाते हैं या नहीं? हालांकि, हार-जीत का अंतिम फैसला तो लहार की जनता के हाथ में ही रहने वाला हैं.