भोपाल: कान्हा टाइगर रिजर्व में मंगलवार की सुबह सीडीवी संक्रमित एक और बाघ की मौत हो गई। सीडीवी संक्रमित टाइगर की 23 दिनों तक उपचार चला पर डॉक्टर उसको नहीं बचा सके। कान्हा टाइगर रिजर्व के किसली रेंज के संदूकखोल में दो जून को पर्यटकों को सफारी के दौरान एक बाघ का व्यवहार असामान्य लगा। वह तेजी से यहां-वहां भाग रहा था और कमजोर नजर आ रहा था। पार्क प्रबंधन ने क्षेत्र को पर्यटकों के लिए अस्थायी रूप से बंद कर बाघ की निगरानी बढ़ा दी। प्रारंभिक मानिटरिंग में अधिकारियों ने बाघ रेस्क्यू कर मुक्की क्वारंटाइन सेंटर लाया गया। मुक्की क्वारंटाइन सेंटर में 23 दिन तक उपचार चला। 

दो माह में आठ बाघों की मौत

कान्हा अभयारण्य में पिछले दो माह में आठ बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें से छह की मौत कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से हुई है। 21 से 29 अप्रैल के बीच अमाही बाघिन टी-141 और उसके चार शावकों का पूरा कुनबा वायरस की चपेट में आने से समाप्त हो गया। 19 मई को महावीर बाघ की मौत भी वायरस से हुई थी।

अप्रैल से फैलना शुरू हुआ वायरस

कान्हा में बाघों की मौत का सिलसिला विगत 21 अप्रैल से शुरू हुआ। सबसे पहले महज 18 माह से भी कम उम्र के शावक की मौत हुई। इसके बाद लगातार मौतों का सिलसिला जारी रहा और दूसरा शावक 24 अप्रैल तथा तीसरा शावक 25 अप्रैल को काल के गाल में समा गया। यह सिलसिला थमने की बजाय और बढ़ता ही गया और चंद दिनों के बाद 29 अप्रैल को फिर दो शावकों की मौत हो गई। उसके बाद 19 मई को 6 साल के बाघ की मौत हो गई। इन सभी की मौत की वजह कैनाइन डिस्टेंपर वायरस को माना जा रहा है।