डरिए समय की मार से क्योंकि बुरा समय किसी को बताकर नहीं आता..! ये लाइन आज अतीक अहमद की जिंदगी पर बिल्कुल सटीक बैठ रहीं हैं. करीब 17 साल पुराने मामले में आज एक परिवार को इंसाफ मिला तो वहीं अतीक का बुरा वक्त शुरू हुआ.
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की स्पेशल एमपी/एमएलए कोर्ट ने आज अतीक अहमद समेत 3 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई हैं. अतीक को ये सजा किस मामले में सुनाई गई है? कैसे उसका बुरा वक्त अब शुरू हो गया है? क्यों अतीक के लिए आगे और मुश्किलें खड़ीं हो सकती हैं?
राजू पाल से लेकर उमेश पाल हत्याकांड तक-
इन तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए आपको पूरे 17 साल पीछे जाकर 25 जनवरी साल 2005 को हुए ‘राजू पाल हत्याकांड’ के बारे में जानना होगा. ये उन दिनों की बात हैं जब इलाहाबाद (प्रयागराज) पश्चिम विधानसभा सीट से अतीक अहमद विधायक हुआ करते थे. अतीक ने इसी सीट से पांच बार चुनाव लड़ा और जीते भी लेकिन साल 2004 में अतीक यूपी की फूलपुर लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर सांसद बन गए थे.
सांसद बने तो विधानसभा सीट ख़ाली हो गई, फिर उपचुनाव का ऐलान हुआ तो सपा ने अतीक के छोटे भाई अशरफ को अपना उम्मीदवार बनाया. तो वहीं बसपा से राजू पाल को टिकट मिला. राजू पाल ने अशरफ को हराकर अतीक के गढ़ से जीत हासिल कर ली.
जीत तो मिली लेकिन जिंदगी से हाथ थोना पड़ गया क्योंकि साल 2005 में 25 जनवरी के दिन दिनदहाड़े प्रयागराज की सड़कों पर राजू पाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उस समय उमेश पाल इस हत्याकांड के मुख्य गवाह थे. करीब एक साल बाद गवाही रोकने के लिए 28 फरवरी 2006 को उमेश पाल का अपहरण कर लिया गया.
समय आगे बढ़ा तो फिर एक दिन साल 2007 में उमेश पाल ने प्रयागराज के धूमनगंज थाने में अपहरण का केस दर्ज करवाया. उमेश पाल ने शिकायत में बताया था कि 28 फरवरी 2006 को अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ कुछ लोगों के साथ आया और अपहरण कर अपने दफ्तर ले गया. वहां जमकर मारपीट कर गवाही देने पर जान से मारने की धमकी देने लगा. इस मामले में पहले पांच लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज करवाया गया था.
उस समय यूपी में मायावती की सरकार बन गई थी. फिर जाँच आगे बढ़ी तो ‘उमेश पाल अपहरण’ मामले में कई लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया. अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ सहित कुल 11 लोगों के खिलाफ़ नामजद मुक़दमा दर्ज किया गया था.
17 साल बाद मिला इंसाफ़-
करीब 17 साल बाद 28 मार्च 2023 यानी आज ‘उमेश पाल अपहरण’ केस के सिलसिले में अतीक अहमद, उनके भाई अशरफ समेत 10 आरोपियों को प्रयागराज की स्पेशल एमपी/एमएलए कोर्ट में व्यक्तिगत तौर पर पेश किया गया.
पर बता दें कि ये वहीं उमेश पाल हैं जिनको हाल ही में 24 फरवरी के दिन ‘राजू पाल हत्याकांड’ की तरह ही दिनदहाड़े प्रयागराज की सड़कों पर गोलियों से इस तरह छलनी कर दिया था कि मौके पर ही मौत हो गई थी.
अब ‘उमेश पाल हत्याकांड’ पर भी कयास तो यहीं लगाये जा रहे हैं कि अतीक अहमद के इशारे पर ही उन्हें दिनदहाड़े गोलियों से छलनी कर दिया गया था ताकि वो कोर्ट में गवाही न दे सके. लेकिन जानकारी के मुताबिक, हत्या से एक दिन पहले ही उन्होंने कोर्ट में अपना बयान दर्ज करवा दिया था.
फ़िलहाल, उमेश पाल के हत्यारे फरार हैं तो वहीं आज उनके ‘अपहरण’ मामले में कोर्ट का फैसला भी आ गया हैं. 10 आरोपी में से अतीक अहमद के भाई अशरफ अहमद समेत सात आरोपियों को निर्दोष करार दिया गया है. तो वहीं कोर्ट ने अतीक अहमद, सौलत हनीफ और दिनेश पासी को दोषी ठहराया हैं.
बता दें कि अतीक अहमद समेत तीन दोषियों पर उम्रकैद की सजा सुनाते हुए कोर्ट ने उन पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है. यह जुर्माना ‘उमेश पाल’ के परिवार वालों को दिया जाएगा.
अपहरण के बाद हत्या का कब मिलेगा इंसाफ-
कोर्ट द्वारा ‘उमेश पाल अपहरण’ मामले में इंसाफ़ मिलने के बाद अब परिवार यह मांग कर रहा हैं कि ‘उमेश पाल हत्याकांड’ में भी कानून इंसाफ दें क्योंकि उनका दावा हैं कि हाल ही में अतीक अहमद के इशारे पर ही उमेश पाल की हत्या की गई.

ख़ुलेआम प्रयागराज की सड़कों पर उमेश पाल की हत्या मामले में अब परिवार अतीक को "फांसी की सज़ा" सुनाये जाने की मांग लिए इंसाफ की आस में एक बार फिर कानून और योगी सरकार की तरफ देख रहा हैं.