मध्य प्रदेश सरकार राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने की योजना बना रही है। इसके तहत मार्च में जैविक किसानों का सम्मेलन होगा। सरकार वाटर चेस्टनट किसानों को सब्सिडी देने पर भी विचार कर रही है। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों से सुझाव मांगे जाएंगे ताकि समस्याओं को दूर कर ज्यादा से ज्यादा जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा सके।

सरकार बागवानी के विस्तार के लिए जिला स्तर पर जिला बागवानी सलाहकार समितियां गठित करने की योजना बना रही है। किसान इस समिति के सदस्य होंगे। सरकार बागवानी फसलों को आवारा पशुओं और जंगली जानवरों से बचाने के लिए फार्म फेंसिंग के लिए अनुदान भी देगी। यह फैसला उद्यान विभाग की बैठक में लिया गया है।

जैविक खेती क्या है?
आपको बता दें कि बढ़ती आबादी ने भी कृषि पर दबाव डाला है और सभी के लिए भोजन उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में किसानों ने अधिक उपज प्राप्त करने के लिए कृषि में रसायनों और अकार्बनिक पदार्थों का उपयोग करना शुरू कर दिया, लेकिन अब समय बीतने के साथ इन रसायनों के उपयोग के नुकसान हम सभी के खिलाफ आ रहे हैं। जिससे नई-नई बीमारियां तो फैल रही हैं लेकिन मिट्टी की क्षमता भी खराब हो रही है।

ऐसे में कई किसान प्राकृतिक खेती की ओर लौट रहे हैं और रासायनिक यूरिया आदि से दूरी बनाए हुए हैं। यह न केवल मिट्टी और पानी के स्वास्थ्य में सुधार करता है, बल्कि प्रदूषण के प्रसार को भी रोकता है। यही कारण है कि सरकार भी किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

तेजी से बढ़ रहा जैविक खेती बाजार
भारत की बात करें तो हमारे देश में जैविक खेती का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में जैविक खेती का बाजार 2020 में 849 मिलियन डॉलर का था, जिसके 2026 तक बढ़कर 2601 मिलियन डॉलर होने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि लोग तेजी से जैविक उत्पादों के उपयोग की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे जैविक कृषि उत्पादों की भारी मांग बढ़ गई है। ऐसे में जैविक खेती की ओर जाना किसानों के लिए लाभदायक सौदा साबित हो सकता है। इससे किसानों का खर्चा भी कम होगा।