भोपाल: देश में विलुप्त होने की आधी सदी बाद, दक्षिण अफ्रीका से चीता प्रदेश के पालपुर कूनो श्योपुर में 15 अगस्त तक आने की संभावना है. चीते की पहली खेप दक्षिण अफ्रीका से आ रही है. इस बीच चीता के लिए बनाए गए बाड़े में तेन्दुएं की उपस्थिति से पार्क प्रबंधन के हाथ पैर फूलने लगे हैं. तेंदुए को बाड़े से निकालने के लिए पार्क प्रबंधन और देहरादून से आए विशेषज्ञों की टीम रात दिन मेहनत कर रही है किंतु अभी तक उसे असफलता हाथ लगी है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत में आने वाले दक्षिण अफ्रीका के चीतों का स्वास्थ्य परीक्षण कर लिया गया है. संक्रमण से बचाने के लिए करीब 6 टीके भी लगाए जा चुके हैं. उन्हें ट्रेंकुलाइज कर माइक्रोचिप भी लगाया गया है. अभी उनको सतत निगरानी में रखा गया है. करीब 13 अगस्त या उसके आसपास के दिनों में उन्हें भारत के लिए रवाना किया जाएगा.
बताया जाता है कि उन्हें जोहान्सबर्ग से दिल्ली के लिए एक मालवाहक विमान से भारत लाया जाएगा. डॉक्टर और विशेषज्ञों की टीम उनके साथ होगी. यात्रा के दौरान उन्हें जगाने और शांत रखने के लिए एक हल्का अप्लाई भी दिया जाएगा, चीता का सफर आसान हो जाए. एक महीने तक चीता को बाड़े में रखा जाएगा, उनकी विशेष निगरानी की जाएगी. इसके बाद ही पालपुर कूनो राष्ट्रीय उद्यान के मैदानों में छोड़ा जाएगा.
तेंदुआ बन सकते हैं सिरदर्द-
चीता स्वागत में की गई तैयारियों के साथ पार्क प्रबंधन के लिए तेंदुआ बड़ा सिरदर्द बन गया है. चीता के लिए बनाए गए बाड़े में चार तेंदुआ और उनके शावक ने अपना ठिकाना बना लिया है. तेंदुए को भगाने के लिए पार्क प्रबंधन 3 दिनों से रात दिन मेहनत कर रहा है किंतु अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिली.
वन्य प्राणी विशेषज्ञों का मानना है कि पालपुर कूनो में तेंदुए की उपस्थिति से चीता के जीवन पर संकट के बादल मंडराते रहेंगे. तेंदुआ चीता का शिकार कर सकता है. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि वन्य प्राणी विशेषज्ञ बाल्मिक थापर पहले ही तेंदुए और जंगली कुत्तों की उपस्थिति होने से कुनो में चीता के संकट में होने की ओर शासन का ध्यान आकर्षित कर आ चुके हैं. यानी तेंदुए कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता शावकों को मारकर जनसंख्या को सीमित कर सकते हैं.
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