झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरन को गुरुवार सुबह बड़ा झटका लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चुनाव आयोग ने सीएम सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी है। यह कार्रवाई अवैध खनन मामले से तार जुड़ने के आरोप में की गई है। इसके बाद झारखंड में सियासी संकट खड़ा हो गया है।
इसके साथ हेमंत सोरेन के अब मुख्यमंत्री बने रहने पर संकट आ गया है। अब हेमंत सोरेन के पास दो विकल्प बताये जा रहे हैं। पहला यह कि वे इस्तीफा देकर छह माह के भीतर दोबारा चुनाव जीतकर आएं या फिर अपने किसी विश्वस्त को CM पद की शपथ दिलाएं। अगर ऐसा होता है तो हेमंत अपनी पत्नी कल्पना का नाम आगे कर सकते हैं।
राज्य में जिस तरह सियासी संकट चल रहा है उसे देखते हुए हेमंत सोरेन के लिए अपनी पत्नी को बागडोर देना आसान नहीं होगा। कल सीबीआई की कार्रवाई में हेमंत के करीबी मंत्री के घर से एके-47 मिलने के बाद शिकंजा और कस गया है। ऐसे में विधायकों को एकजुट रखना हेमंत के लिए आसान नहीं होगा।
हेमंत सोरेन को भी इस चुनाव आयोग की इस कार्रवाई का पहले ही अंदेशा था। हाल ही में उन्होंने गठबंधन की बैठक बुलाई थी। हालाँकि उस बैठक से भी कुछ विधायक गायब रहे थे जिसके बाद सरकार को खतरा बताया जाने लगा था।
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस साल फरवरी में दावा किया था कि सोरेन ने अपने पद का दुरुपयोग किया और खुद को खनन पट्टा आवंटित किया, यह एक ऐसा मुद्दा है जिसमें हितों के टकराव और भ्रष्टाचार दोनों शामिल हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया। विवाद का संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने मई में सोरेन को एक नोटिस भेजकर खनन पट्टे पर उनका पक्ष मांगा था।