केजरीवाल की गिरफ्तारी पर CM मोहन यादव बोले- पद के मोह से बाहर आकर इस्तीफा देना चाहिए


स्टोरी हाइलाइट्स

ईडी ने दिल्ली शराब घोटाला मामले में गुरुवार शाम को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया था. ईडी की टीम कल शाम केजरीवाल के आवास पर पहुंची थी..!!

दिल्ली की शराब नीति मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गुरुवार (21 मार्च) की रात ईडी ने गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद से देश भर में सियासी हलचलें काफ़ी तेज है. एक तरफ आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता बीजेपी पर निशाना साध रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ बीजेपी भी आप पार्टी पर हमलावर है. केजरीवाल की गिरफ्तारी पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी बड़ा बयान दिया है.

केजरीवाल की गिरफ्तारी पर सीएम मोहन यादव ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वह एक सीएम के रूप में जेल जा रहे हैं, पद के लिए इतना लालच अरविंद केजरीवाल को शोभा नहीं देता. उन्हें सीएम पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था. केजरीवाल को पहले जांच का सामना करना चाहिए. हमारे देश का इतिहास रहा है कि जब किसी पर आरोप लगता है तो वह सबसे पहले इस्तीफा देता है और जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक वह दायित्व नहीं लेता है.

उन्होंने आगे तर्क देते हुए बताया कि लालकृष्ण आडवाणी इसका उदाहरण हैं, जब उनका नाम एक कथित डायरी में झूटा नाम आया था तो उन्होंने तुरंत ही इस्तीफा देकर जांच का सामना किया था, कोर्ट का फैसला आने के बाद ही उन्होंने चुनाव लड़ा था. लोकतंत्र में यह पहली जरुरत होती है कि अगर आप पार ऊंगली उठ रही है तो इस्तीफा देना चाहिए. इसी शराब नीति केस में ही अरविंद केजरीवाल के दो मंत्री जेल में हैं.

सीएम मोहन यादव ने आगे कहा, अब तक 21 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, 9 बार उनको ईडी की तरफ से समन भेजा गया, वह हाईकोर्ट भी गए लेकिन जब उनको कोर्ट से राहत नहीं मिली तो उन्हें सबसे पहले इस्तीफा देना चाहिए. अगर वह जांच में बरी होते तो फिर से अपनी सरकार चलाते, लेकिन पद का इतना मोह उन्हें शोभा नहीं देता है. वहीं, जेल से सरकार चलाने वाले सवाल पर उन्होंने कहा कि यह पद का मद चढ़ रहा है, वह किसी भी हालत में पद नहीं छोड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें लोकतंत्र के लिए इस्तीफा देना चाहिए.

बात दें कि दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल को ईडी की टीम ने गुरुवार रात गिरफ्तार कर लिया था. जिसके बाद ईडी केजरीवाल को अपने कार्यलाय लेकर गई. दिल्ली सीएम को आज यानी शुक्रवार (22 मार्च) को पीएमएलए कोर्ट में पेश किया जाएगा. इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट के जरिए आप के राष्ट्रीय संयोजक को एजेंसी की किसी दंडात्मक कार्रवाई से राहत देने से इनकार करने के कुछ ही घंटों बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.