मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधवार को विदिशा में श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ, श्रीमद भागवत कथा एवं संत समागम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि आत्मा के मोक्ष और जगत हित के लिए जो कार्य करे वही सत्य है। विदिशा मेरी कर्म भूमि रही है और आज भी है। यहाँ भक्ति रस की गंगा बह रही है और चारों तरफ आनंद बरस रहा है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कथा स्थल पर पहुँच कर सबसे पहले कथावाचक पंडित धीरेन्द्र शास्त्री का शाल-श्रीफल से सम्मान कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने भजनों का गायन भी किया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भी साथ दिया।

इस मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने परमात्मा की प्राप्ति के लिए तीन मार्गी सिद्धांतों ज्ञान, भक्ति और कर्म मार्ग पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रदेश के अधिकारी, कर्मचारियों को निःस्वार्थ भाव से कार्य करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जनता को ठीक दिशा दिखाना और सुखी बनाना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने बेटियों और महिलाओं के उत्थान के लिए संचालित लाड़ली लक्ष्मी योजना, कन्या विवाह तथा मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के उद्देश्यों पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महिलाओं पर होने वाले अपराधों के नियंत्रण और दुराचारियों को दंडित करने के लिए प्रदेश में नये कानून बनाए गए हैं।

इस मौके पर विदिशा सांसद रमाकांत भार्गव, विधायक सर्वश्री हरि सिंह सप्रे, लीना जैन, राजश्री सिंह और  रामपाल सिंह राजपूत, जिला पंचायत अध्यक्ष गीता रघुवंशी, नगरपालिका अध्यक्ष सुश्री प्रीति शर्मा, सांसद प्रतिनिधि द्वय राकेश शर्मा, कैलाश रघुवंशी, डॉ. राकेश जादौन और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।