भोपाल: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की उपस्थिति में हुई बैठक में  विधायकों ने जय युवा आदिवासी शक्ति संगठन (जयस) की बढ़ती राजनीतिक दखलअंदाजी का विरोध किया गया. इसकी शुरुआत पूर्व मंत्री एवं विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने किया.

हुआ यूं कि आदिवासी अत्याचार को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने आदिवासी विधायकों के साथ राजभवन पहुंचकर राज्यपाल मंगू भाई पटेल को ज्ञापन सौंपा. राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने के बाद आदिवासी विधायकों के साथ कमलनाथ ने प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के मुद्दे को लेकर चर्चा की. इस चर्चा में जयश के राष्ट्रीय संयोजक एवं कांग्रेस विधायक डॉ हीरालाल अलावा भी उपस्थित थे. 

चर्चा की शुरुआत कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी की सभा कहां कराई जाए, इसे लेकर मंथन हुआ. प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष विक्रांत भूरिया और कुछ विधायक चाहते थे कि राहुल गांधी की सभा झाबुआ में हो. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाथ ने जब राहुल गांधी की सभा को लेकर पूर्व मंत्री एवं विधायक उमंग सिंघार से सलाह ली तब उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष को बताया कि सरदारपुर विधानसभा क्षेत्र में राहुल गांधी की सभा होनी चाहिए. 

यह स्थान धार, झाबुआ और रतलाम से लगा हुआ है. सिंघार के सलाह पर कमलनाथ ने अपनी सहमति भी जताई. इसके बाद जब विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चा शुरू हुई तब कमलनाथ के क्षत्रप और विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने कहा कि जयस के प्रदेश अध्यक्ष मेरे खिलाफ ही विधानसभा क्षेत्र में लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जयस के द्वारा  कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. 

मरकाम के बाद धार जिले के विधायक सुरेंद्र सिंह हनी, प्रताप ग्रेवाल और अन्य विधायकों ने भी जयस की बढ़ती गतिविधियों को लेकर कहा कि विधानसभा क्षेत्रों में असमंजस की स्थिति है. जयस द्वारा कांग्रेस के वोट बैंक को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस विधायकों की जयस के खिलाफ जताई नाराजगी को लेकर गंभीरता से लिया है.

आदिवासी अत्याचार को लेकर राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन-

पीसीसी चीफ कमलनाथ और नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर गोविंद सिंह के साथ आदिवासी विधायक राजभवन पहुंचे. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के नेतृत्व में राजभवन पहुंचे आदिवासी विधायको ने राज्यपाल मंगू भाई पटेल से की न्याय की मांग की है. दिलचस्प पहलू यह है कि आदिवासी विधायक अर्जुन काकोड़िया सहित 5 विधायकों को ही अंदर जाने की इजाजत दी गई.