भोपाल : प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में अब हाईकोर्ट के अवमानना संबंधी नोटिस लेने से इस आधार पर मना नहीं किया जा सकेगा कि संबंधित अधिकारी अब यहां पदस्थ नहीं है तथा उसका ट्रांसफर हो गया है।
राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव विनोद कुमार ने इस संबंध में सभी कार्यालय प्रमुखों को निर्देश जारी कर कहा है कि उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों का पालन नहीं होने की स्थिति में राज्य शासन के विभिन्न विभागों/कार्यालयों में पदस्थ अधिकारियों को अवमानना प्रकरणों के नोटिस जारी किए जाते हैं।
कुछ मामलों में अधिकारियों के स्टाफ में पदस्थ लिपिकीय कर्मचारियों अथवा निज सहायक द्वारा असंगत कारणों से या इस आधार पर अवमानना प्रकरण के नोटिस को प्राप्त करने से मना किया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी अब वहां पदस्थ नहीं है या उनका स्थानान्तरण हो चुका है।
उच्च न्यायालय द्वारा इस प्रकार की कार्यवाही पर आपत्ति व्यक्त की गई है। इस प्रकार नोटिस प्राप्त करने से इनकार करने के कारण कुछ प्रकरणों में माननीय न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती/ गैर जमानती वारंट भी जारी किए गए हैं।निर्देश में कहा गया है कि उप महाधिवक्ता द्वारा यह व्यक्त किया गया है कि अवमानना नोटिस में उल्लेखित संबंधित अधिकारी के केवल स्थानान्तरण हो जाने मात्र से, राज्य अथवा उसके बाद उस पद पर पदस्थ हुए अधिकारी उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के पालन के दायित्व से मुक्त नहीं होते हैं।
यदि किसी अधिकारी का ऐसा मत है कि पारित आदेश के पालन का दायित्व उससे अपेक्षित नहीं है, ऐसी स्थिति में भी उसके द्वारा अवमानना नोटिस को प्राप्त करने से मना नहीं किया जाएगा बल्कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अवमानना प्रकरण में अपना पक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
इसलिये निर्देशित किया जाता है कि, किसी भी अधिकारी द्वारा उनके नाम से उच्च न्यायालय द्वारा जारी अवमानना नोटिस प्राप्त करने से इनकार नहीं किया जाए एवं नोटिस जिस अधिकारी के नाम से है, उसके द्वारा या अधिकृत कर्मचारी द्वारा प्राप्त किया जाए। तदोपरांत प्रतिवादी अधिकारी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया अनुसार न्यायालय में अपना पक्ष प्रस्तुत किया जावे। इन निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाये।