भोपाल। कांग्रेस के सांसद दिग्विजय सिंह एक बार फिर अपनी ही पार्टी के विधायक उमंग सिंघार के वन मंत्री रहते लिये एक निर्णय को रद्द करने हेतु मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर इस निर्णय को निरस्त करने का आग्रह किया है। मामला आदिवासी बहुल मंडला जिले में निवास विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत राजा दलपत शाह अभ्यारण्य बनाये जाने का है।
वर्ष 2019 में उमंग सिंघार ने वन मंत्री रहते यह नया अभ्यारण्य बनाने का निर्णय लिया था जिस पर अब निरन्तर कार्यवाही चल रही है। दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखे अपने ताजा पत्र में कहा है कि मंडला जिले में कान्हा राष्ट्रीय उद्यान व टाईगर रिजर्व और फेन अभ्यारण्य पहले ही बन चुके हैं। कान्हा का कोर एरिया 94 हजार हेक्टेयर एवं इसका बफर जोन 1 लाख 13 हजार हेक्टेयर है और फेन अभ्यारण्य का 11 हजार हेक्टेयर वन रकबा संरक्षित किया जा चुका है। इसके कारण कई गांव विस्थापित हो चुके हैं। राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य के कारण आस-पास लगे गांव के निवासियों की समस्याओं पर वन विभाग ने कभी ध्यान नहीं दिया। पश्चिम वनमंडल मंडला द्वारा राजा दलपत शाह अभ्यारण्य बनाये जाने हेतु शासन को प्रस्ताव भेजा है। इस पत्र पर विचार करते हुए आदिवासी परिवारों के बड़े पैमाने पर विस्थापन को देखत हुए प्रस्तावित राजा दलपतशाह अभ्यारण्य निरस्त किया जाये।
कांग्रेस विधायक ने दी है असहमति :
दरअसल मंडला जिले के निवास विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक डॉ. अशोक मर्सकोले से डीएफओ पश्चिम मंडला वनमंडल ने प्रस्तावित राजा दलपत शाह अभ्यारण्य बनाने के लिये सहमति मांगी थी परन्तु विधायक ने यह कहकर सहमति नहीं दी कि उनके विधान सभा क्षेत्र में पूर्व में ही औद्योगिक क्षेत्र मनेरी चुटका परियोजना, सीताखुदरी डेम, करोंदी डेम में विस्थापित हुए आदिवासी भाई दर-दर भटकने का दंश झेल रहे है तथा ऐसी स्थिति में उनके पूरे विधानसभा क्षेत्र का एक तिहाई हिस्सा (133.492 वर्ग किमी) यदि इस अभयारण्य हेतु प्रस्तावित किया जाता है, तो फिर पुन: उनके क्षेत्र के लोगों को विस्थापन का दंश झेलना पड़ेगा। विधायक ने दिग्विजय सिंह को भी इस बारे में पत्र लिखकर अपना विरोध जताया है। उल्लेखनीय है कि उमंग सिंघार जब वन मंत्री थे तब उन्होंने भी कई मुद्दों को लेकर दिग्विजय सिंह के खिलाफ सार्वजनिक रुप स मोर्चा खोला था।