भोपाल. दागी अफसरों की वजह से राज्य वन सेवा से भारतीय वन सेवा के पद के लिए होने वाली डीपीसी पर पानी फिर गया है. अब उन्हें अगले साल डीपीसी का इंतजार करना पड़ेगा. ऐसी स्थिति वन विभाग मुख्यालय द्वारा दागी अधिकारियों के प्रस्ताव भेजे जाने से निर्मित हुई है. 

सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय और मुख्यालय में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों ने ही राज्य वन सेवा के ऐसे अधिकारियों के नाम भेजें जो आरोपों से घिरे हैं और जिनकी एससीआर दागदार रही है. 

वर्ष 2022 में राज्य वन सेवा के 9 अफसरों को आईएफएस पद के लिए डीपीसी होना था. इस डीपीसी को लेकर यूपीएससी ने वन विभाग से कई जानकारियां मांगी थी. इसमें दागी अफसरों की कुंडलियां भी शामिल है. सूत्रों के अनुसार किसी की एसीआर खराब है तो किसी के खिलाफ कई गंभीर आरोप भी हैं. डीपीसी को लेकर यूपीएससी द्वारा उठाए गए सवाल का जवाब देने से राज्य शासन हिचकिचा रही है.

दिसंबर के मध्य तक यूपीएससी द्वारा पूछी गई जानकारियों का जवाब शासन द्वारा नहीं भेजा गया. इसके कारण इस साल होने वाली डीपीसी टल गई. इसके पहले भी राज्य वन सेवा से अखिल भारतीय वन सेवा के लिए होने वाली डीपीसी टलती रही है. 

राज्य वन सेवा के अधिकारियों का मानना है कि यदि वन विभाग के शीर्ष अधिकारी दागी अफसरों का नाम डीपीसी के लिए प्रस्तावित नहीं करते तो राज्य पुलिस सेवा की तरह राज्य वन सेवा के अधिकारी भी प्रमोट हो जाते.

किसी पर आरोप है तो किसी का एसीआर दागी

आईएफएस बनने की कतार में खड़े गंधू सिंह धुर्वे पर बहुचर्चित बालाघाट टीपी कांड से लेकर कई गंभीर आरोप हैं. इसी प्रकार  रामकुमार अवधिया पर लंबे समय से आरोपों से घिरे हुए हैं. काशीराम यादव के खिलाफ शासित अधिरोपित किया गया है. 

यही वजह है कि पिछली डीपीसी में भी इनके नाम क्लियर नहीं हो पाए थे. पिछली डीपीसी में गंभीर आरोपों के चलते ही सीमा द्विवेदी का लिफाफा बंद किया गया था. जबकि इंदू सिंह गडरिया मामला भी बड़ा दिलचस्प है. यह जब बैतूल में पदस्थ थे, तब महिला अधिकारी के खिलाफ अब अभद्र व्यवहार किया था. उनके इस कृत्य से नाराज तत्कालीन सीसीएफ एचयू खान ने उनकी एसीआर बिगाड़ दी थी. 

सूत्रों ने बताया कि शीर्ष अधिकारियों को मैनेज कर गड़रिया ने अपनी एससीआर सुधरवा ली है और अब वे आईएफएस की दौड़ में शामिल हो गए हैं. विद्या भूषण सिंह और राघवेंद्र सिंह का मामला कोर्ट में है. इसके अलावा सीमा द्विवेदी, मनोज कटारिया,  विद्या भूषण मिश्रा के खिलाफ पूर्व सीसीएफ शहडोल पीके वर्मा ने कथित आरोप पत्र जारी किया था, जिसे वर्तमान सीसीएफ शहडोल ने क्लीन चिट दे दिया है. 

आईएफएस की दौड़ में शामिल प्रियंका चौधरी भी शामिल है. प्रियंका चौधरी के खिलाफ सीसीएफ अनुसंधान एवं विस्तार भोपाल की राखी नंदा ने व्हाट्सएप पर आज संसदीय भाषा का प्रयोग और अभद्र व्यवहार करने की शिकायत दर्ज कराई है, जिसकी जांच चल रही है.

आईएफएस के लिए इन नामों पर होना था मंथन

गंधू सिंह धुर्वे, काशीराम जाधव, इंदू सिंह गडरिया, रामकुमार अवधिया, सीमा द्विवेदी, लोकप्रिय भारती, हेमलता शाह, प्रियंका चौधरी, संजय रायखेरे, अमित पटौदी, विद्या भूषण मिश्रा, अमित कुमार सिंह चौहान, अर्चना पटेल, ऋषि मिश्रा, आशीष बंसोड़, राघवेंद्र सिंह, विद्या भूषण सिंह के नाम शामिल है.