भोपाल. मंत्रालय में पदस्थ अपर सचिव वन अशोक कुमार अब रायसेन वर्किंग प्लान का चैप्टर नहीं लिखेंगे. उनकी जगह वर्किंग प्लान का चैप्टर लिखने की जिम्मेदारी छतरपुर वर्किंग ऑफिसर अजय पांडेय को दी गई है. कुमार के वर्किंग प्लान लिखने की अनदेखी करने की वजह से चालू वित्तीय वर्ष में रायसेन वन मंडल में न तो कटाई हो पाएगी और इसका असर राजस्व आय पर भी पड़ सकता है.
दिलचस्प पहलू यह भी है कि वित्तीय नुकसानी के लिए अपर सचिव वन अशोक कुमार को विभाग जिम्मेदार भी नहीं मान रहा है. जबकि वर्किंग प्लान में पोस्टिंग की जॉइनिंग में 7 दिन विलंब होने पर एक प्रमोटी आईएफएस हरिशंकर मिश्रा को निलंबित कर दिया गया था. यानि वन विभाग अपने ही बनाए नियम पर कार्यवाही चेहरा देखकर करता रहा है.
वन विभाग में स्थापित नियम है कि हर आईएफएस अधिकारी को वर्किंग प्लान लिखनी होती है. इसी नियम के तहत 2006 बैच के आईएफएस अधिकारी अशोक कुमार को एक अगस्त 20 रायसेन वर्किंग प्लान लिखने के लिए सागर में पदस्थापना की गई थी. वर्किंग प्लांन वर्क करने के दौरान ही शासन ने उनकी पदस्थापना राज्य मंत्रालय में अपर सचिव के पद पर कर दी. विभाग ने मंत्रालय में कुमार की पदस्थापना पर आपत्ति नहीं की. जबकि शीर्ष अधिकारियों को यह पता था शासन में पदस्थ रहते हुए अशोक कुमार वर्किंग प्लान नहीं लिख सकते हैं.
बावजूद इसके, विभाग ने उनकी पदस्थापना पर एनओसी दे दी. कुमार शासन में इतने व्यस्त हो गए कि वर्किंग प्लान का चैप्टर लिखने का समय ही नहीं मिल पाया. मामला तब उजागर हुआ, जब कुमार ने स्वयं चैप्टर लिखने के लिए शासन के कार्य से अवकाश की गुहार लगाई. इस पर उप सचिव मोहित बिंदास ने विभाग से स्पष्टीकरण मांग लिया. विभाग अभी भी बिंदास के पत्र का जवाब नहीं दे सका और कुमार के अधूरे कार्य को पूरा करने के लिए छतरपुर वर्किंग प्लान ऑफिसर अजय पांडे को अतिरिक्त जिम्मेदारी दे दी गई है.
अगस्त 22 में जमा करनी थी किताब..
वर्किंग प्लान का चैप्टर नहीं लिखने और वर्किंग प्लान कार्यालय में लगातार गैरहाजिर रहने पर अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्रीय वर्किंग प्लान ऑफिसर भोपाल श्रीमती कोमिलिका मोहन्ता ने वर्किंग प्लान ऑफिसर सागर अशोक कुमार का वेतन रोकने की सिफारिश की है. इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि कुमार को अगस्त 22 तक रायसेन वर्किंग प्लान चैप्टर लिखकर किताब जमा करनी थी, आज दिनांक तक जमा नहीं की गई है. यानी वर्किंग प्लान नहीं लिखने की वजह से उनका वेतन रोकने के साथ अन्य सुविधाओं से भी वंचित करने की सिफारिश कर दी. श्रीमती मोहंता की सिफारिश के बाद मुख्यालय से लेकर शासन तक हड़कंप मच गया. सागर वर्किंग प्लान कार्यालय से वेतन नहीं देने की सिफारिश के बाद विभाग ने कुमार से वर्किंग प्लान की जिम्मेदारी ले ली. अब उनका वेतन सतपुड़ा मुख्यालय से निकलेगा.
वर्किंग प्लान विलंब होने का क्या होगा असर?
रायसेन वन मंडल का वर्किंग प्लान हुए विलंब की वजह से चालू वित्तीय वर्ष में वनों की कटाई में व्यवधान आ सकता है. इसके अलावा शासन को राजस्व हानि भी होने की संभावना है. हालांकि वन बल प्रमुख आरके गुप्ता कहते हैं कि मंत्रालय में एक अच्छे अधिकारी की आवश्यकता थी और एसीएस फॉरेस्ट की भी पसंद अशोक कुमार थे इसलिए उनकी मंत्रालय में पोस्टिंग की गई थी. गुप्ता कहते हैं कि वर्किंग प्लान में हुई विलंब के टाइम को कवर करने की कोशिश की जाएगी. उनका कहना है कि विभाग का प्रयास होगा कि रायसेन का वर्किंग प्लान जुलाई-अगस्त तक केंद्र सरकार से स्वीकृति हो जाए. वर्किंग प्लान के बुक में अशोक कुमार का नाम भले ही प्रकाशित न हो किंतु रेफरेंस में जरूर उनके कार्यों का उल्लेख होगा. यानी वर्किंग प्लान बनाने वाले अफसरों की सूची में उनका नाम दर्ज रहेगा.
रसूखदार के सामने बेबस विभाग
एक रसूखदार अफसर के सामने पूरा विभाग किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति में है. विभाग ने मार्च में आदर्श श्रीवास्तव, कमल अरोरा, पीएन मिश्रा और नरेश यादव के प्रस्ताव वर्किंग प्लान के लिए भेजे थे. लेकिन मार्च में एक आदेश जारी कर आदर्श श्रीवास्तव की वर्किंग प्लान अधिकारी के रूप में इंदौर में पोस्टिंग कर दी गई. जबकि रसूखदार आईएफएस अधिकारी कमल अरोरा की वजह से अन्य तीन अधिकारियों की पदस्थापना वर्किंग प्लान बनाने के लिए भी नहीं हो पा रही है. यहां विभाग के शीर्ष अफसरों ने मुख्य सचिव अथवा सीएम सचिवालय को यह बताने की कोशिश नहीं की गई कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और विभाग के नियम के अनुसार वर्किंग प्लान की पदस्थापना समय पर करने के सख्त निर्देश है. जबकि मुख्यमंत्री सचिवालय अजय पांडेय को रीवा सर्किल में पदस्थ करने की सिफारिश की थी तब विभाग के सारे बड़े अधिकारी सीएम सचिवालय को यह बताने की कोशिश की कि इससे मैसेज गलत जाएगा, क्योंकि एक अधिकारी को सस्पेंड कर चुके हैं. अब तीन अधिकारियों वर्तमान में पदस्थ करने में हो देरी के लिए कौन जिम्मेदार है? यह विभाग तय नहीं कर पा रहा है.