भौतिक सत्यापन न करने से सहकारी संस्थाओं में हो रहा है गबन


स्टोरी हाइलाइट्स

सहकारी संस्थाओं में नगदी एवं अन्य सम्पत्तियों का सहकारी अधिकारी भौतिक सत्यापन नहीं कर रहे हैं, जिससे इन संस्थाओं में गबन के मामलों में हो रहे हैं..!

भोपाल: प्रदेश की सहकारी संस्थाओं में नगदी एवं अन्य सम्पत्तियों का सहकारी अधिकारी भौतिक सत्यापन नहीं कर रहे हैं। जिससे इन संस्थाओं में गबन के मामलों में हो रहे हैं तथा जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्यवाही भी नहीं हो पा रही है।

सहकारिता आयुक्त संजय गुप्ता ने सभी संभागों के संयुक्त आयुक्तों एवं उप/सहायक आयुक्त अंकेक्षण को जारी अपने परिपत्र में कहा है कि प्रतिवर्ष 31 मार्च की स्थिति पर संस्थाओं की नगदी एवं अन्य आस्तियों के भौतिक सत्यापन किये जाने के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किये जाने के बाद भी इनका पालन नहीं किया जा रहा है।

इससे एक ओर संस्थाओं के लाभ-हानि की वास्तविक स्थिति प्रदर्शित नहीं हो पा रही है वहीं दूसरी ओर से अमानत में खयानत करने तथा संस्था की संपत्ति को हानि पहुंचाने के लिये उत्तरदायी संस्था कर्मचारियों पर यथासमय कार्रवाईयां भी नहीं हो पा रही हैं।

इसलिये भौतिक सत्यापन कार्य में कार्यपालिक कर्मचारियों के साथ लिपिकीय कर्मचारियों को भी संलग्न किया जावे जिससे कम समय में अधिकाधिक संस्थाओं का भौतिक सत्यापन संपन्न हो सके। भौतिक सत्यापन में जिस अंकेक्षक द्वारा संस्था का अंकेक्षण वर्ष 2020-21 में किया गया है उसके स्थान पर अन्य कर्मचारी को निर्देशित करें तथा प्रत्येक संस्था का भौतिक सत्यापन संपन्न कराकर तदाशय का प्रमाण-पत्र भी मुख्यालय को प्रेषित किया जावे। वर्ष 2021-22 के संपरीक्षा प्रतिवेदन में भौतिक सत्यापन के पत्रक निर्धारित प्रारूप में संलग्न न होने पर आयुक्त कार्यालय में प्रतिवेदन ग्राह्य नहीं किये जावेंगे।

1880 आडिट रिपोर्ट पड़ी हैं लंबित :

प्रदेश के सहकारी कार्यालयों में सहकारी संस्थाओं से आई 1880 आडिट रिपोर्ट लंबित पड़े हुये हैं। सहकारिता आयुक्त ने अधीनस्थ अधिकारियों से कहा है कि लंबित रखे गये कतिपय प्रतिवेदन एक माह से अधिक अवधि के हैं। यह स्थिति अत्यंत खेदजनक है। प्रत्येक स्थिति में 7 दिवस से अधिक अवधि के बाद कोई संपरीक्षा प्रतिवेदन कार्यालय में अकारण लंबित नहीं रखा जावे।