वन भूमि पर अतिक्रमण: बुरहानपुर में हिंसक झड़प और श्योपुर में टकराव की स्थिति


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स्टोरी हाइलाइट्स

बुरहानपुर वन मंडल में हटाने को लेकर रविवार को अतिक्रमण माफिया और प्रशासन के बीच हिंसक झड़प हुई, जबकि श्योपुर वनमंडल में दो हजार हेक्टयर वन भूमि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की तो वहां तनाव का माहौल..!!

भोपाल: मप्र में लगभग 5.46 लाख हेक्टेयर से अधिक वन भूमि पर अतिक्रमण है, जो राज्य की कुल वन भूमि का लगभग 7.17% हिस्सा है। रविवार को बुरहानपुर वन मंडल में हटाने को लेकर रविवार को अतिक्रमण माफिया और प्रशासन के बीच हिंसक झड़प हुई। जबकि श्योपुर वनमंडल में दो हजार हेक्टयर वन भूमि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की तो वहां तनाव का माहौल है। यदि समय रहते शासन-प्रशासन नहीं चेता तो यहां भी कानून व्यवस्था बिगड़  सकती हैं। उल्लेखनीय है कि यह भारत में किसी भी राज्य में वन भूमि पर अतिक्रमण का सबसे बड़ा मामला है। राज्य सरकार ने एनजीटी (NGT) को दी गई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है।

बुरहानपुर जिले में रविवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अ​तिक्रमण हटाए जाने के दौरान भीड़ ने प्रशासनिक अमले पर पथराव कर दिया। वनभूमि को खाली कराने पहुंचे प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच बुरहानपुर के झांझर गांव में हालात अचानक हिंसक हो गए। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान भीड़ ने पथराव कर दिया, जिससे पूरा इलाका रणक्षेत्र में बदल गया। घटना के बाद गांव में तनाव फैल गया है और भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

नेपानगर वन परिक्षेत्र, बुरहानपुर वनमंडल के अंतर्गत झांझर क्षेत्र में चलाए जा रहे अतिक्रमण निरोधी अभियान के दौरान अतिक्रमणकारियों के एक समूह द्वारा संयुक्त कार्यबल पर पथराव किया गया। यह टास्क फाॅर्स वन विभाग, पुलिस विभाग एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों/कर्मचारियों से मिलकर गठित था।

हटाने से पहले विधिवत नोटिस दिए गए 

अतिक्रमण बेदखली कार्यवाही से पूर्व सभी अतिक्रमणकारियों को  पूर्व में विधिवत बेदखली नोटिस जारी किए गए थे। परंतु अतिक्रमणकारियों द्वारा अपना अतिक्रमण नहीं हटाया रविवार को जब वन पुलिस और राजस्व विभाग का संयुक्त दल  कार्यवाही करने पहुंचा तो कार्यवाही का विरोध  करते हुए पथराव कर दिया गया। साथ ही अतिक्रमण रोधी कार्यवाही में लगी तीन जेसीबी मशीनों के कांच फोड़ दिए तथा एक जेसीबी चालक के सिर में चोट आई जिसे तत्काल मौके पर मौजूद एम्बुलेंस से जिला अस्पताल ले जाया गया । उपचार के उपरांत घायल जेसीबी चालक खतरे से बाहर है। पथराव की घटना के बावजूद टीम द्वारा कार्रवाई जारी रखते हुए लगभग 190 हेक्टेयर क्षेत्र से 49 अवैध रूप से बनाए गए आधे अधूरे अस्थायी झोपड़ियों को हटाया गया तथा अतिक्रमण रोधी ट्रेंच खोदी गई।

श्योपुर में वन भूमि को लेकर टकराव की नौबत

श्योपुर सामान्य वन मंडल की खाड़ी रेंज में जंगल पर कब्जे को लेकर बवाल: 4 साल से रह रहे अतिक्रमणकारी आमने-सामने, नई कटाई पर विवाद, जंगल कट रहा नीरो चैन की बांसुरी बजा रहा। खाड़ी रेंज की मोरेका बीट में करीब 2 हजार हेक्टयर जंगल की जमीन पर अवैध रूप से रह रहे अतिक्रमणकारियों के बीच अब टकराव की स्थिति बन गई है। बीते 4 साल से जंगल में बसे लोग अब ज्यादा जमीन पर कब्जे और कटाई को लेकर आपस में भिड़ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, मोरेका बीट के अंतर्गत जार की तलैया और रई नामक स्थान पर अतिक्रमण कर रह रहे लोगों के बीच पिछले 4 दिनों से विवाद बढ़ गया है। जार की तलैया बस्ती के पटेल सिब्बू आदिवासी का कहना है कि “हम लोग पहले से जितनी जमीन पर रह रहे हैं, उतने में ही काम करने की समझाइश दे रहे हैं, लेकिन रई स्थान के लोग मानने को तैयार नहीं हैं और रोज जंगल काटकर आगे बढ़ रहे हैं।” 

सूत्रों के मुताबिक, पिछले करीब 4 वर्षों से इन क्षेत्रों में अतिक्रमण कर लोग जंगल की जमीन पर खेती कर रहे हैं। अब जमीन बढ़ाने की होड़ में आपसी संघर्ष खुलकर सामने आ रहा है।सभी अतिक्रमणकारियों को बेदखली के लिऐ धारा 80 अ के नोटिस सर्व हुए करीब डेढ़ साल होगया लेकिन वन विभाग वन भूमि से बेदखली करने में हमेशा नाकाम रहा जिसके कारण लगातार अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हो रहे खाड़ी रेंज में। इस मामले के 3 माह पहले जब खाड़ी रेंजर दिनेश कौशल 3-4 स्टाफ को लेकर गश्त पर गए थे तो  उस समय भी अतिक्रमणकारियों ने लाठी डंडे से हमला कर दिया था। यही नहीं, 14 जून 25 का मामला है जब टास्क फोर्स की टीम अतिक्रमण हटाने गई तो ताबड़तोड़ हमला हुआ । टास्क फोर्स की उचित रणनीति ना बनने के कारण यह ऑपरेशन असफल रहा।

दक्षिण पन्ना 1.5 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण से मुक्त

मोहंद्रा रेंज में अतिक्रमण के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई

दक्षिण पन्ना वनमण्डल के मोहंद्रा वन परिक्षेत्र में वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों के सुरक्षित आवास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए अम्हा बीट में एक प्रभावी अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया। इस कार्रवाई में लगभग 1.5 हेक्टेयर वन भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया। विभाग द्वारा किए गए सर्वेक्षण के आधार पर अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद मौके पर कार्रवाई की गई। भूमि को कब्जामुक्त कराने के साथ ही भविष्य में अतिक्रमण की पुनरावृत्ति रोकने के लिए वन सीमा पर गहरी खाई (ट्रेंच) खोदने का कार्य भी किया गया है।