प्रदेश में सिस्टम कमजोर पड़ने से भारी बारिश का दौर बुधवार को थमता नज़र आ रहा है लेकिन बीते तीन दिनों से हो रही बारिश से नर्मदा, ताप्ती, शिप्रा, पार्वती, बेतवा और चंबल उफान पर हैं। कमोबेश सारे डेम लबालब हैं। अब भी पुलिया और नदी चढ़ने से कई सड़कों का संपर्क टूटा हुआ है। 

भोपाल के बांधों से छोड़े गए पानी के कारण बेतवा नदी खतरे के निशान के करीब है। विदिशा के सभी जलाशयों में अधिक जलभराव होने के कारण बांधों के गेट भी खुले हुए हैं। इस कारण बेतवा और उनकी सहायक नदियों में  जलस्तर तेजी से बढ़ रहा हैं। कुछ निचली बस्तियों में जलभराव होने लगा है। बाढ़ वाले गणेश भी बेतवा में समाये नज़र आ रहे हैं।  

राजगढ़ जिले के मोहनपुरा डैम के 14 गेट खोले गए हैं। डैम से साढ़े 5 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जलभराव के चलते सैकड़ों गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूटा हुआ है। पुराने बस स्टैंड के आस-पास 30 से ज्यादा दुकानें डूबी हुई हैं।  

इधर श्योपुर में पार्वती और चंबल नदी उफान पर आने से कई गांव टापू से नज़र आ रहे हैं। श्योपुर का राजस्थान से संपर्क टूट गया है। पार्वती नदी पर बने पुल के ऊपर से पानी बह रहा है वहीं सीप नदी का भी जल स्तर भी बढ़ा हुआ है. 

अतिवृष्टि के कारण पूरे प्रदेश में बाढ़ की स्थितियों को देखते हुए प्रशासन सतर्क है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी स्थिति पर लगातार नज़र बनाये हुए हैं। स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। राज्य सरकार के प्रवक्ता और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बुधवार सुबह बताया कि बारिश का दौर थमने से प्रदेश में बाढ़‌ की‌‌ स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी लगातार कम हो रहा है।