वन विभाग पलटा : अब नर्मदा किनारे से 5 किमी की परिधि में अतिक्रमण बलपूर्वक नहीं हटाया जायेगा


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स्टोरी हाइलाइट्स

5-5 किमी की परिधि में व्याप्त अतिक्रमण को बलपूर्वक नहीं हटाया जायेगा बल्कि स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने के लिये अतिक्रमाकों को प्रेरित किया जायेगा..!!

भोपाल: राज्य सरकार का वन विभाग पलट गया है तथा अब नर्मदा तट के किनारे से दोनों ओर 5-5 किमी की परिधि में व्याप्त अतिक्रमण को बलपूर्वक नहीं हटाया जायेगा बल्कि स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने के लिये अतिक्रमाकों को प्रेरित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि 21 अगस्त 2025 को वन विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णमाल ने निर्देश जारी कर कहा था कि नर्मदा नदी जीवनदायिनी नदी है तथा इसे सदानीर एवं संरक्षित करने की जरुरत है। इसलिये 13 दिसम्बर 2005 के बाद बाद नर्मदा किनारे की वन भूमि के समस्त अतिक्रमाणों को चिन्हित कर अतिक्रमण निरोधी अभियान चलाकर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया जाये। 

लेकिन अब वन विभाग अपने इस निर्देश से पलट गया है तथा उसने पुन: निर्देश जारी कर कहा है कि चिन्हित अतिक्रमाकों को स्वेच्छा से नर्मदा किनारे की वन भूमि को रिक्त करने के लिये प्रेरित किया जाये। राज्य के अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने भी बल पूर्वक अतिक्रमण हटाने पर आपत्ति करते हुये वन विभाग को पत्र लिखा था जिस पर उन्हें यही जवाब दिया गया था कि स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने के लिये प्रेरित किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के सीहोर जिले में जून 2025 में इच्छावर और लाडकुई वन परिक्षेत्र से 2 हजार से अधिक अक्रिमणकर्ता आदिवासियों को वन विभाग ने बेदखल कर दिया था। इससे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान बहुत नाराज हुये थे। इसी कारण से वन विभाग को अब नर्मदा नदी किनारे की वन भूमि से बलपूर्वक अतिक्रमण हटाने से पीछे हटना पड़ा है तथा वह अब स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने की बात कह रहा है।