भोपाल: मप्र के पूर्वी जिलों रीवा, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया आदि से छत्तीसगढ़ राज्य से आ रहे हाथियों के प्रबंध के लिये राज्य का वन विभाग तीन साल में चार करोड़ रुपये व्यय करेगा।  वन विभाग के अंतर्गत हाथियों के प्रबंधन के लिये एक करोड़ रुपयों का प्रावधान रखा गया है। आने वाले सालों में पुन: डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपयों का और बजट प्रावधान बजट में रखा जायेगा।

हाथियों के प्रबंधन में धारा 144 भी लगाई जायेगी:

प्रदेश के जंगलों में घूम रहे जंगली हाथियों द्वारा ग्रामीणों एवं सम्पत्ति को हानि पहुंचाने से रोकने के लिये वन विभाग द्वारा बनाई कार्ययोजना में यह भी प्रावधान किया गया है कि संबंधित जिलों का प्रशासन धारा 144 लगाकर हाथियों के सामने उग्र हुये जनसमुदाय को रोकेगा।

जिला प्रशासन को जंगली हाथियों से प्रभावित ग्रामवासियों हेतु वैकल्पिक अस्थाई रहवास में मदद करना होगी एवं उनके लिये भोजन, पानी एवं अन्य संसाधनों की भी उपलब्धता सुनिश्चित करना होगी।

इसके अलावा, जिला प्रशासन को जंगली हाथियों द्वारा नष्ट मकानों की मरम्मत कराना होगी एवं मुआवजा भी देना होगा। हाथियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित (ट्रांसलोकेशन) करने पर क्षतिपूर्ति का भुगतान एवं अन्य आकस्मिक परिस्थिति में बड़ी भूमिका भी अदा करना होगी।