भगवान को भी चूहों या अन्य किसी चीज से खलल होता है? जगन्नाथ पुरी मंदिर के मामले में यही नजर आ रहा है। दरअसल, यहां चूहों ने आतंक मचा रखा है। चूहों के झुंड ने भगवान के कपड़े तक कुतर डाले हैं। मंदिर में हाल ही में चूहों ने कब्जा कर लिया है, वे देवताओं के कपड़े और माला चबा रहे हैं। इतना ही नहीं गर्भगृह में गंदगी भी फैला रहे हैं। पूजा और भोग की पेशकश के दौरान देवताओं के लिए एक ऊंचे आसन रत्न सिंहासन पर चूहे देखे गए।
चूहों को भगाने के लिए एक भक्त ने मंदिर को मशीन दान में दी लेकिन अब मंदिर प्रशासन ने इसके उपयोग से मना कर दिया। मशीन को गर्भगृह में लगाया गया था, लेकिन देखा गया कि इससे काफी शोर हो रहा है और मंदिर प्रशासन का कहना है कि मशीन का प्रयोग मंदिर के गर्भगृह में नहीं किया जा सकता है क्योंकि इससे जो भनभनाने वाली आवाज निकलती है उससे भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की नींद में खलल पड़ती है।
मंदिर के सेवक सत्यनारायण पुष्पलक ने कहा कि हमें आसपास के कृंतकों व उनके कचरे के साथ अनुष्ठान करना मुश्किल लगता है। चूहे देवताओं के चेहरे तक खराब कर रहे हैं। वहीं चूहा- विकर्षक मशीन को हटा दिया गया क्योंकि वादारों ने इस मशीन को लेकर शिकायत की थी और इसे हटाने का अनुरोध किया था। मंदिर प्रशासक जितेंद्र साहू ने कहा, हमने मशीन का उपयोग नहीं करने का फैसला किया है। इसे गर्भगृह में आजमाया। कुछ दिनों पहले मशीन से एक भनभनाहट सुनी।
संचालक ने कहा कि ध्वनि कृन्तकों को डराती है, लेकिन सेवादारों ने इसे लाल झंडी दिखा दी। चूहों को भगाने की मशीन हटाकर गर्भगृह में माउस ट्रैप लगाने व मंदिर परिसर के बाहर पकड़े गए चूहों को छोड़ने की बोझिल प्रक्रिया के समाधान के रूप में देखा गया है।
सदियों की परंपरा
कैच - एंड रिलीज एकमात्र विकल्प है क्योंकि मंदिर के चूहों को मारना मना है और इसलिए जहर की भी अनुमति नहीं है। मंदिर प्रशासकों ने बताया कि मंदिर की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है कि जब भगवान जगन्नाथ सो जाते हैं तो जय विजय द्वार (द्वार) से गर्भगृह तक पिन-ड्रॉप साइलेंस होता है। घना अंधेरा किया जाता है। ताकि भगवान शांति से सो सकें।