भोपाल. डिंडोरी के जंगलों में अवैध कटाई का सिलसिला जारी है. अवैध कटाई के मामले में डीएफओ साहिल गर्ग की भूमिका भी संदेह के दायरे में है, क्योंकि वे दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं. गर्ग कार्रवाई के नाम पर खटाई में लिप्त पाए गए वनरक्षकों रिकवरी निकाल कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं.
डिंडोरी वन मंडल के डिंडोरी, शाहपुर, समनापुर, बजाग और करंजिया पश्चिम में अवैध कटाई धड़ल्ले से हो रही है. यही नहीं, गुड़नेर नदी के किनारे कौहा के पेड़ों की छाल भी अवैध रूप से निकाली जा रही है. इसकी शिकायत सीएम हेल्पलाइन में 2020 में की गई है परंतु अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है.
मैदानी वन कर्मचारी बताते हैं कि डीएफओ साहिल गर्ग अवैध कटाई की शिकायत आने पर रेंजर और एसडीओ को भेज देते हैं वह स्वयं मौका स्थल पर नहीं जाते. एसडीओ और रेंजर द्वारा की जाने वाली वीट निरीक्षण के दौरान अवैध कटाई के टूट पाए भी जाते हैं तो दोषी वन रक्षकों के खिलाफ कोई सख्त कार्यवाही नहीं हो रही है.
सूत्रों ने बताया कि स्थानीय कांग्रेस विधायक एवं पूर्व मंत्री ओमकार सिंह मरकाम के दबाव में डीएफओ दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं कर पा रहे हैं. डीएफओ ने कांग्रेस विधायक के दबाव में अमरपुर के भानपुर में पदस्थ वनरक्षक गंगाराम मरावी को अवैध कटाई के लिए दोषी पाए जाने के बावजूद भी केवल रिकवरी निकाल दी पर वसूली अभी तक नहीं की है. डीएफओ कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार 2020 से और 2022 के बीच कई बार वनरक्षक गंगाराम मारावी को दोषी पाया गया किंतु डीएफओ उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही नहीं कर पाए है.
कार्रवाई करने की कोशिश पर बुरे फंसे रेंजर
दिलचस्प पहलू यह भी है कि अवैध कटाई और कार्यों के प्रति लापरवाही करने पर भी वनरक्षक गंगाराम के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होने के पीछे भी वजह स्पष्ट है. ग्राम पंचायत मोहरी के गुधाराम ने अतिक्रमण, कटाई और अवैध परिवहन से संबंधित सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की है. इस शिकायत के निराकरण की जिम्मेदारी डीएफओ ने रेंजर मयंक पांडेय को सौंपी. रेंजर मयंक ने जब कार्रवाई करना चाही तब उनके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर जिला न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया गया. वर्तमान में रेंजर जंगलों की सुरक्षा के बजाय मुकदमा झेल रहे हैं