पिछले विधानसभा चुनाव 2018 में सरकार की नींद उड़ा देने वाला ‘माई का लाल’ शब्द अब एक बार फिर अगले विधानसभा चुनाव से करीब 10 महीने पहले ही भोपाल में सुनाई देने लगा है. माना जाता है कि इसी एक शब्द ने बीजेपी को 2018 में सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया था. अब एक बार फिर ‘माई का लाल’ शब्द मध्यप्रदेश की सियासत को हिलाने का काम कर रहा हैं.

भोपाल के जंबूरी मैदान से शुरू हुआ 8 जनवरी का जन आंदोलन अब एक नए ज़ोश के साथ शहर के अंदर सड़कों तक जा पहुंचा हैं. करणी सेना परिवार के नेतृत्व में सर्व समाज ने साथ आकर 8 जनवरी के दिन लाखों की संख्या में जंबूरी मैदान पहुंचकर 21 सूत्रीय मांगों के लिए हुंकार भरी थी. इस आंदोलन के कारण एमपी की सियासत में भी उथल-पुथल मची हुई है.

करणी सेना की 21 सूत्रीय मांगों में दो प्रमुख मांग आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू हो, साथ ही Sc-St एक्ट में संशोधन कर जांच के बाद ही गिरफ्तारी का प्रावधान किया जाये शामिल हैं. फ़िलहाल करणी सेना का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी हैं. करणी सेना का कहना है कि अभी 8 जनवरी जितनी संख्या तो नहीं है लेकिन एक आवाज पर फिर से उतने ही लोग भोपाल में दिखाई देने लग जायेंगे.  

करणी सेना परिवार की 21 सूत्रीय मांग-

करणी सेना के मुखिया जीवन सिंह शेरपुर के नेतृत्व में आंदोलनकारी 9 जनवरी की सुबह जंबूरी मैदान से निकलकर महाराणा प्रताप चौक की तरफ जाने लगे थे लेकिन पुलिस ने उन्हें भेल चौराहे पर ही बैरिकेट लगाकर रोक दिया. तभी से करणी सेना का आंदोलन सड़क पर ही जारी हैं. इस आन्दोलन में जीवन सिंह समेत करीब 5 लोग भूख अनशन पर हैं.

सरकार ने साधी चुप्पी-  

जंबूरी मैदान से शुरू हुआ आंदोलन अब एक नया मोड़ ले चूका हैं. इस आंदोलन से सरकार की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं. आंदोलनकारियों का कहना है कि अगर सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो 2023 के विधानसभा चुनाव में उनकी कुर्सी तक डगमगाने लग जाएगी. इन सब के बीच शिवराज सरकार ने फ़िलहाल इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली हैं. 

तो वहीं कांग्रेस की तरफ से कमलनाथ ने शिवराज सरकार पर निशाना साधते हुए आंदोलन का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि लोगों को दबाने और परेशान करने से कुछ नहीं होगा बल्कि सरकार को उनकी ज़रूरी बाते सुननी चाहिए, उनपर विचार कर जो जायज मांगे हैं उन्हें तुरंत मान लेना चाहिए.

मिशन-2023 से पहले करणी सेना का बड़ा बयान-

करणी सेना के मुखिया जीवन सिंह शेरपुर का साफ़ तौर पर कहना है कि अगर सरकार हमारी मांग नहीं मानती है तो करणी सेना अगले विधानसभा चुनाव में नई पार्टी बनाकर मैदान में उतरकर मौजूदा सरकार को सत्ता से बाहर का रास्ता तक दिखाने का काम करेगी. फिर उसके बाद इन 21 सूत्रीय मांगों को मनवाने का काम करेगी.   

दो गुटों में बटा राजपूत समाज-

बता दें कि 8 जनवरी जन आन्दोलन से पहले ही मुख्यमंत्री आवास पर 5 जनवरी के दिन शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में राजपूत महापंचायत का आयोजन किया गया था. जिसमें कई मांगे रखी गई थी. सीएम शिवराज ने अधिकतर मांगों को स्वीकार भी कर लिया था. लेकिन उस समय भी कुछ प्रमुख मांगों पर सरकार ने चुप्पी साधने का काम किया था.

राजपूत महापंचायत पर जीवन सिंह शेरपुर का कहना है कि हमारा 8 जनवरी का कार्यक्रम करीब 6 महीने पहले से ही तय था. लेकिन हमें मिल रहे जनसमर्थन से सरकार डरने लगी थी. इसलिए सामाजिक नेताओं के ज़रिये कुछ संगठनों के करीब 100 लोगों को अचानक सीएम हाउस बुलाकर राजपूत समाज को बाटने और कमजोर करने का काम किया गया था. ये सरकार द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम था. उसमें भी हमारी जो दो प्रमुख मांगे हैं उन्हें दवाने का काम किया गया.