भोपाल: राज्य सरकार ने घटना के 13 दिन बाद लटेरी कांड की जांच के लिए एकल सदस्य जांच आयोग का गठन कर दिया है। लटेरी मुठभेड़ की जांच हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे। रिटायर्ड न्यायमूर्ति वीपीएस चैहान को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। आयोग को तीन महीने में विस्तृत रिपोर्ट देना होगी।

राज्य सरकार ने एक सदस्य जांच दल गठित करने के साथ ही जांच के मुख्य बिंदू भी पर जांच की जाएगी, जिसमें वे परिस्थितियां जिसमें घटना हुई? क्या वनकर्मियों द्वारा जो बल प्रयोग किया गया, वह घटना की परिस्थितियों को देखते हुए उपयुक्त था या नहीं? यदि नहीं, तो इसके लिए दोषी व्यक्ति? भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इस हेतु आवश्यक सुझाव। इसके अलावा  ऐसे अन्य विषय, जो जांच के अधीन मामले में आवश्यक या आनुषांगिक समझे जाएं।

क्या है मामला-

यहां यह उल्लेखनीय है कि 9 अगस्त को विदिशा वन मंडल के अंतर्गत दक्षिण लटेरी के खड्यापूरा क्षेत्र में जंगल से सागौन की लकड़ी काट कर ले जा रहे संगठित चोर गिरोह और वन कर्मियों के बीच मुठभेड़ हुई और गोलीबारी में चैन सिंह नामक व्यक्ति की मौत हो गई। वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार चैन सिंह के खिलाफ लकड़ी चोरी का मामला न्यायालय में चल रहा था।

घटना के बाद मृतक परिवार को राज्य सरकार की ओर से 25 लाख रूपये का मुआवजा दिया गया। जबकि जंगलों की सुरक्षा कर रहे हैं वन कर्मियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया। यही नहीं डिप्टी रेंजर निर्मल सिंह की भादवि की धारा  302, 307 और 34 के तहत गिरफ्तारी की गई। पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ  वन कर्मियों ने अपने शस्त्र जमा किए और न्यायिक जांच की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाया।