भोपाल: राज्य के वन विभाग के अंतर्गत कार्यरत मप्र सहकारी लघु वनोपज संघ ने राज्य शासन को बीस करोड़ रुपये की अंश पूंजी लौटा दी है। लेकिन इसके बावजूद अभी भी संघ में अभी भी बीस करोड़ रुपये से अधिक राज्य शासन की अंश पूंजी और जमा है। संघ पूरी अंश पूंजी लौटाना चाहता था परन्तु राज्य शासन ने संघ में अपना नियंत्रण बनाये रखने के लिये आधी ही अंश पूंजी वापस ली है।

दरअसल पिछले साल वित्त विभाग ने सभी उपक्रमों से राज्य शासन ने अपनी वित्तीय स्थिति सुदृढ़ करने के लिये उसकी उपक्रमों में जमा अंश पूंजी लौटाने के लिये कहा था। लघु वनोपज संघ ने अंश पूंजी लौटाने के लिये शर्त रखी दी कि यदि वह अंश पूंजी लौटाता है तो संघ के संचालक मंडल में नामांकित राज्य शासन के तीन सदस्यों को भी बाहर करना होगा।

ये तीन सदस्य पीएस वन, पीएस वित्त एवं पीएस सहकारिता हैं। संघ ने यह शर्त इसलिये रखी क्योंकि यदि उपक्रम में कुल अंश पूंजी में राज्य शासन की पूंजी 50 प्रतिशत से अधिक होती है तो उसके संचालक मंडल में शासन के प्रतिनिधि रखने होते हैं ताकि संघ का संचालक मंडल मनमाना निर्णय नहीं ले सके।

संघ अपने संचालक मंडल से शासन के प्रतिनिधि इसलिये बाहर भी रखना चाहता था ताकि उसके यहां सूचना का अधिकार कानून लागू न हो सके। लेकिन राज्य शासन ने संघ में जमा अपनी 41 करोड़ 91 लाख 83 हजार 807 रुपये अंश पूंजी में से आधी ही वापस ली। अभी राज्य शासन की आधी अंश पूंजी  संघ में और जमा है तथा यह भी 50 प्रतिशत से अधिक है। इससे संघ पर अभी भी राज्य शासन का नियंत्रण बना हुआ है।