भोपाल। वर्ष 2023 के अंत में देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों समेत मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कमर कस ली है, इन दिनों मध्य प्रदेश को उन्होंने अपनी  कर्मभूमि बना लिया है, लगातार बढ़ते दौरे और देर रात तक उनकी चलती बैठकों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि वे मध्य प्रदेश को किसी अन्य नेता के भरोसे नहीं छोड़ेंगे... शाह ने कहा हैं  कि किसी लोकल नेता के चेहरे पर चुनाव नहीं लड़ा जाएगा, एक ही चेहरा होंगे नरेंद्र मोदी और पूरी कमान रहेगी अमित भाई शाह के हाथ में।

कभी राष्ट्रीय नेता लाल कृष्ण आडवाणी मध्य प्रदेश को पार्टी की "प्रयोगशाला" कहते थे और वर्ष 2003 के चुनाव में उन्होंने अपने रणनैतिक कौशल से कांग्रेस का शासन उखाड़  फेंकने में महती भूमिका निभाई थी ।अब लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की सरजमी गुजरात से आने वाले दूसरे सशक्त गृह मंत्री अमित भाई शाह भी इसी तर्ज पर चल पड़े हैं।

अमित शाह ने मध्य प्रदेश को अपना स्थाई ठिकाना बना लिया है, बीते एक महीने में मध्य प्रदेश में उनकी तीन आधिकारिक यात्रा हो चुकी है। वे भारतीय जनता पार्टी के भोपाल स्थित मुख्यालय के दीनदयाल परिसर में मैराथन बैठकें ले रहे हैं। ढलती शाम से लेकर अगले दिन सुबह तक वे जीत हार के समीकरण पर माथा पच्ची करते दिखाई देते हैं। छोटे से छोटे कार्यकर्ता से लेकर प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा के नाम ,नंबर उनकी टिप्स पर हैं ।

यही नहीं उन्होंने अपने दो केंद्रीय मंत्री प्रदेश के प्रभारी श्री भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव को भी किनारे करते हुए सारे सूत्र अपने हाथ में रखे हैं । दो टूक शब्दों में उन्होंने कह भी दिया है कि व्यक्तिगत पसंद और नापसंद कहीं दिखाई नहीं देनी चाहिए, अनुभवी और पुराने कार्यकर्ताओं की चिंता की जाए और केवल जीतने वाले पर ही भरोसा करें ...प्राथमिकता पार्टी रहेगी ना की कोई रिश्तेदारी।

शाह ने प्रदेश भाजपा के संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा को जिम्मा  दिया है कि पार्टी में पुराने कार्यकर्ताओं से मिलकर रिपोर्ट प्रस्तुत करें, जिससे राज्य में पार्टी की नब्ज टटोली जा सके। राज्य भर में उपेक्षित और नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने के जतन भी शुरू कर दिए गए हैं ।अमित शाह ने अब तक तीन बैठकें भोपाल में आकर ली हैं, जिसमे उन्होंने अलग-अलग अंचल और उससे जुड़ी नाजुक सीटों का गणित समझा। इसी कड़ी में 27 जुलाई को हुई बैठक के बाद वे 30 जुलाई को मध्य प्रदेश के मालवा अंचल में दौरा करेंगे, उसके बाद विजय संकल्प यात्रा ग्वालियर चंबल महाकौशल और बुंदेलखंड सहित विभिन्न क्षेत्रों में होगी जिसमें सीटों की गहन पड़ताल शुरू की जा सकेगी।

पार्टी के आंतरिक सर्वे और विभिन्न माध्यमों से करवाए गए सर्वेक्षण में भारतीय जनता पार्टी की नाजुक हालत , हालिया कर्नाटक की हार से सबक लेते हुए अमित शाह अब कोई भी रिस्क लेना नहीं चाहते हैं। दिल्ली में मिले मध्य प्रदेश के नेगेटिव फीडबैक को भापते हुए केंद्रीय नेतृत्व ने यह तय किया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के दम पर मप्र में विजय श्री का वरण हो पाना संभव नहीं है इसलिए अमित शाह को मैदान में उतारा गया है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा महिलाओं के लिए प्रारंभ की गई लाडली बहना योजना और युवाओं पर केंद्रित सीखो कमाओ योजना दोनों ने कुछ हद तक पार्टी का ग्राफ सरकार के रास्ते जनता में बढ़ा जरूर दिया है ,लेकिन अमित शाह इससे पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे । गुजरात फार्मूले पर काम करते हुए श्री शाह ने दो केंद्रीय मंत्रियों ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर को चंबल, शिवराज सिंह चौहान को मध्य भारत, प्रहलाद सिंह पटेल को महाकौशल और बुंदेलखंड , अपने पुराने भरोसेमंद और पार्टी के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गी को मालवा और निमाड़ में बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए जल्द ही विजय संकल्प रैली निकालने का आदेश दिया है।

कुल मिलाकर अमित शाह ने मध्य प्रदेश की कमान अपने हाथ में ले ली है और वे अपने दम पर ही इस अश्वमेध यज्ञ की पूर्णाहुति करना चाहते हैं। उनकी दिग्विजय यात्रा का अंतिम लक्ष्य होगा 2023 में मप्र में भाजपा का राज और 2024 के आम चुनाव में फिर मोदी सरकार।