भोपाल: नर्मदापुरम वन मंडल के इटारसी रेंज के पांडरी वन क्षेत्र के अंतर्गत छीपीखापा बीट में नवंबर में डेढ़ करोड़ से अधिक मूल्य के सागौन वृक्ष टिम्बर माफिया काट दिए जाने के 9 महीने बाद एसडीओ और रेंजर को आरोप पत्र जारी किए जा रहें हैं। डीएफओ मयंक गुर्जर ने पीसीसीएफ संरक्षण विभाष ठाकुर को गुमराह करने के लिए गोलमोल बीट चेकिंग रिपोर्ट भेजी है। जबकि बीट चेकिंग रिपोर्ट में फारेस्ट ओफेन्स केस रजिस्टर्ड (FOCR) का भी उल्लेख किया जाना जरूरी है।
डीएफओ मयंक गुर्जर ने यह कार्रवाई वह भी तब की, जब पीसीसीएफ संरक्षण विभाष ठाकुर ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा। इसके पहले डीएफओ गुर्जर ने अवैध कटाई पर केवल दो बीट गार्ड को निलंबित किया था।पीसीसीएफ संरक्षण विभाष ठाकुर के नोटिस में आने के बाद भी फील्ड से मिल रही जानकारी के अनुसार सीएफ और डीएफओ इटारसी रेंज के जंगलों से हो रही अवैध कटाई को रोक नहीं पा रहे हैं। यहां तक कि दोनों ही अधिकारी स्पॉट पर मौका-मुआयना करने नहीं पहुंचे। इन्हीं सूत्रों के अनुसार जनवरी 24 से अब तक 5 घनमीटर या उससे अधिक की गोलाई के लगभग 650 सागौन के वृक्ष कट चुके हैं, जिनके ठूँठ आज भी कटाई होने की गवाही दे रहें हैं।
पीसीसीएफ संरक्षण को नर्मदापुरम वन मंडल के इटारसी रेंज के पांडरी वन क्षेत्र के अंतर्गत RF 112 में 356 वृक्ष की अवैध कटाई की बीट चेकिंग और उससे नुकसानी की रिपोर्ट भेजी है। इस रिपोर्ट में एफओसीआर (FOCR) का भी उल्लेख नहीं किया गया है। डीएफओ ने पीसीसीएफ संरक्षण ठाकुर को 27 नवंबर 24, 28 नवम्बर 24, 29 नवंबर 24 और 30 नवंबर 24 को दर्ज वन अपराध प्रकरणों से संबंधित रिपोर्ट भेजी है। जबकि सेवानिवृत्ति एसडीओ मधुकर चतुर्वेदी के आरटीआई के जवाब में 14 अगस्त 25 को दी गई जानकारी के अनुसार अकेले छिपीखापा RF 112 में 619 से अधिक अवैध कटाई के प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
सुरक्षा पहरी कर रहें बंगले की चाकरी
छिपाखापा बीट में हो रही लगातार कटाई को लेकर रिटायर्ड एसडीओ मधुकर चतुर्वेदी ने सीएफ नर्मदापुरम अशोक कुमार को पत्र लिखा है। पत्र में कहा है कि छिपी खापा बीट में सागौन वृक्षों के सेलेक्टिव फ़ेलिंग हो रही है और अधिकारी कटाई का पता तक विभागीय नहीं लगा पा रहे है। ऐसी स्थिति में वनमंडल नर्मदा पुरम कार्यालय में वन रक्षकों को लिपिकीय कार्य में लगाए रखना उचित प्रतीत नहीं होता। इसके अलावा अधिकारियों के निवास पर सेवादारों की भीड़ लगाए रखना भी वन सुरक्षा के प्रति अधिकारियों की रुचि और रणनीति के प्रति जागरूकता संदेह उत्पन्न कर रही है। जबकि पूर्व में वरिष्ठ APCCF एवं प्रशासन दो के मुखिया रहे एचएस मोहता के निर्देश जारी करा हैं कि वन रक्षकों को कार्यालय कार्य में न रखें। फिर भी डीएफओ को वरिष्ठ के आदेश के उल्लंघन हो रहा पर कोई एक्शन नहीं हो रहा है।
गणेश पाण्डेय