राजधानी में स्थित वन विहार नेशनल पार्क के शुरुआत दौर में इक्का-दुक्का चीतल और अन्य वन्य प्राणी मौजूद रहे। इसके चलते तत्कालीन अधिकारियों को भी इसके आबाद होने में तगड़ा पसीना बहाना पड़ा। इसके चलते दूसरे इलाकों से चीतल सहित दूसरे वन्य जीव लाकर यहां पर कुनबा बढ़ाया गया।

अब चार दशक बाद हालत यह है कि इतना सक्षम हो गया है कि दूसरे अभयारण्य यहां इनकी संख्या अधिक होने से दूसरे को चीतल दे रहा है। वन विहार नेशनल अभयारण्यों को देना पड़ रहा है। इसके पार्क के डिप्टी डायरेक्टर अशोक कुमार बदले दूसरे वन्य प्राणियों की अदला-बदली जैन ने बताया कि 16 चीतल बुधवार को की जा रही है।

देवास के खिवनी अभयारण्य में शिफ्ट कर जानकारी के अनुसार यहां 1980 के दिए हैं। 130 और भेजने हैं। दो महीने में दशक में गिने-चुने चीतल थे। तब दूसरों को 38 चीतल दूसरे अभयारण्यों को दे चुके हैं। देने की बात तो दूर, इनका कुनबा बढ़ाने की जिनमें गांधी सागर अभयारण्य का नाम भी चिंता थी।

बैतूल व रायसेन से चीतल लाकर शामिल है। वन में शाकाहारी वन्यप्राणियों बसाने पड़े थे। अब इनकी संख्या 500 के की 26 फरवरी तक गणना होगी। इस गणना पार हो गई है। दूसरे जिलों से चीतल लाकर में चीतलों की संख्या अच्छी होने की बसाने वाला वन विहार नेशनल पार्क अब संभावना है।