MP Forest: अब कार्य आयोजना डीएफओ बनायेंगे


स्टोरी हाइलाइट्स

इस संबंध में राज्य शासन ने नवीन दिशा-निर्देश जारी कर दिये हैं..!!

भोपाल: प्रदेश में अब वन विभाग की कार्य योजना डीएफओ ही बनायेंगे। अब तक मुख्य संरक्षक एवं वन संरक्षक यह बनाते थे। इस संबंध में राज्य शासन ने नवीन दिशा-निर्देश जारी कर दिये हैं।

जारी दिशा-निर्देश में कहा गया है कि प्रत्येक वन वृत्त में एक स्थायी कार्य आयोजना इकाई स्थापित है। यह इकाई वन वृत्त के समस्त वनमण्डलों के लिए कार्य आयोजना का निर्माण कार्य करती है। कार्य आयोजना इकाई के प्रभारी भारतीय वन सेवा के उप वन संरक्षक स्तर के अधिकारी रहेंगे, जो कार्य आयोजना- आंचलिक के भारसाधक अधिकारी के तकनीकी, प्रशासकीय एवं वित्तीय नियंत्रण में रहेंगे। 

भारतीय वन सेवा संवर्ग के उप वन संरक्षक स्तर के अधिकारी जिन्होंने 9 वर्ष की सेवा पूर्ण कर ली है, उन्हें वरिष्ठता सूची अनुसार वरिष्ठता क्रम आने पर कार्य आयोजना इकाई में पदस्थ किया जावेगा। यह पदस्थापना कार्य आयोजना पूरी होने तक की अवधि के लिए होगी।

दिशा-निर्देश में आगे कहा गया है कि यदि कोई अधिकारी भारत सरकार, राज्य शासन एवं अशासकीय संगठनों में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ हो तो ऐसे अधिकारी की सेवाएं प्रतिनियुक्ति से आने पर यदि वे वन संरक्षक के पद पर पदोन्नत नहीं हुए हों तथा उससे कनिष्ठ अधिकारी कार्य आयोजना में पदस्थ हो गया हो तो ऐसे अधिकारी को कार्य आयोजना में अनिवार्यत: पदस्थ किया जायेगा। 

कार्य आयोजना पुनरीक्षण में 2 वर्ष का समय लगता है। इसलिये इकाई में पदस्थापना करते समय यह सुनिश्चित किया जावेगा कि पदस्थ होने वाले अधिकारी की न्यूनतम 2 वर्ष की शासकीय सेवा शेष हो।

क्या होती है कार्य आयोजना:

हर वनमंडल की कार्य योजना बनाई जाती है जिसमें अगले दस साल में किता वृक्षारोपण होगा, कितने वृक्ष काटे जायेंगे, इके पर्यटन की क्या स्थिति रहेगी, कितना कार्बन के्रेडिट मिलेगा आदि विषय रहते हैं। इसे एक पुस्तक के रुप में तैयार किया जाता है और राज्य शासन की सहमति मिलने के बाद केंद्र के पास उसकी मंजूरी के लिये भेजा जाता है। केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद ही कार्य योजना के हिसाब से वनमंडल में कार्यवाही होती है।