बिहार की राजनीति आज या कल में एक नया रुख अख्तियार कर सकती है। नीतीश कुमार भाजपा से गठबंधन तोड़कर अब कांग्रेस,राजद व लेफ्ट के साथ सरकार बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। उनका भाजपा से मोहभंग अपने ही एक करीबी के किसी दूसरे का 'मोहरा' बन जाने से हुआ है। भाजपा में इसे लेकर खासी हलचल है, मामला संभालने की कोशिश जारी है।

दरअसल जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने दूसरे चिराग मॉडल यानी आरसीपी सिंह का जिक्र करके काफी चीजें साफ कर दी हैं। उन्होंने इशारों में कहा कि अभी सिर्फ ट्रेलर बताया है, फिल्म के बारे में भी बताएंगे। दरअसल जेडीय को अपने ही आरसीपी सिंह के ऊपर शक काफी पहले हो गया था और नीतीश ने दीवार पर लिखी वो इबारत पडली जो उद्धव ठाकरे नहीं पढ़ पाए? नीतीश का ऑपरेशन भी तीन महीने पहले शुरू तब हुआ था जब जेडीयू के एक नेता के पास भाजपा की ओर से कॉल आया- 'सुन रहे हैं कि आरसीपी सिंह के पास 32 विधायकों का समर्थन है।

सही बात है क्या?' तभी से जेडीयू के अंदर खलबली मच गई। नीतीश व जेडीयू ने अपने सारे खुफिया नेटवर्क को झोंक दिया। आखिर में जेडीयू इस नतीजे पर पहुंच गई कि आरसीपी वाकई में पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। जेडीयू को यह भी साफ हुआ कि आरसीपी सिर्फ एक डोर हैं और खींचने वाला कहीं और था।

केंद्र से नाराजगी के संकेत और संदेश: इसलिए नाराज नीतीश 17 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में तिरंगे को लेकर देश के सभी मुख्यमंत्रियों की बैठक में नहीं गए, 22 जुलाई को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के विदाई भोज में शामिल नहीं हुए, 25 जुलाई को नवनिर्वाचित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शपथ ग्रहण समारोह में भी नहीं पहुंचे तथा कल प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में नीति आयोग की बैठक में शामिल नहीं हुए।