बसों की हड़ताल- ट्रेनें भी घंटो लेट, मुसाफिरों के लिए परेशानी का दौर


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स्टोरी हाइलाइट्स

ट्रेनें ही थी एकमात्र साहरा, वे भी समय पर नहीं आ रही..!

पिछले दो दिनों से यात्री दोहरी परेशानियों से गुजर रहे हैं। पहली यह कि बसों की हड़ताल है। एक से दूसरे शहरों में जाने के लिए बसें नहीं मिल रही है। ऐसे समय में ट्रेनें ही एक मात्र सहारा है लेकिन वे भी दो से लेकर 12 घंटे की देरी से आ रही है। ऐसे में कोई विकल्प नहीं है।

यात्रा टालना ही विकल्प
भोपाल से खंडवा की यात्रा करने वाले कैलाश दाहिमा का कहना है कि उन्हें सिंगाजी ताप विद्युत गृह में कार्यरत अपने बेटे से मिलने जाना है, उसकी तबीयत खराब है। वह स्वयं भोपाल आने की स्थिति में नहीं है इसलिए जाना जरूरी है, दो दिन से परेशान हूं कोई साधन नहीं मिल रहा है। दिल्ली की ओर से जो ट्रेनें मुंबई की ओर जाती है वे 2 से 12 घंटे की देरी से आ रही है। उनमें पैर रखने की जगह नहीं मिल रही है।

बैतूल का 600 रुपये किराया मांग रहे टैक्सी चालक
इधर हड़ताल के बीच दलाल सक्रिय हो गए है, जो विभिन्न रूटों पर जाने वाले जरुरतमंद यात्रियों को कोरोना काल की तरह अधिक किराया वसूलने के जाल में फंसा रहे हैं। सोमवार रात को एक टैक्सी चालक ने भोपाल से बैतूल का किराया 600 मांगा। नहीं देने पर एक यात्री को ले जाने से मना कर दिया। वहीं जिन यात्रियों ने मुंह मांगा किराया दिया, उन्हें टैक्सी चालक लेकर चला गया।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी बस सेवाएं ठप
ग्रामीण क्षेत्रों में भी बस सेवाएं एकदम से ठप हो गई है। लोग निजी साधनों के भरोसे हैं। जिनके पास निजी साधन नहीं है, वे परेशान हो रहे हैं। वहीं ग्रामीण अंचलों में शहरों से ज्यादा पेट्रोल-डीजल की किल्लत है।