भोपाल: यदि किसी नगरीय निकाय की सीमा में किसी ग्राम को शामिल किया जा रहा है तो उस ग्राम की लोकोपयोगी भूमि का अब स्वरुप नहीं बदलेगा। मसलन यदि ग्राम में कोई भूमि चरनोई, शमशान घाट, कब्रिस्तान, हाट बाजार आदि लोकायेयोगी कार्यां के लिये आरक्षित है तो उस ग्राम के नगरीय निकाय में शामिल होने के बाद आरक्षित भूमि का स्वरुप नहीं बदलेगा। ये ताजा निर्देश राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी ने सभी जिला कलेक्टरों को जारी किये हैं।
निर्देश में बताया गया है कि ग्राम की लोकोपयोगी भूमि का यदि स्वरुप बदलना है तो कलेक्टर को भू-राजस्व संहिता की धारा 233-क के तहत आदेश पारित करना होगा। यदि ऐसा आदेश पारित नहीं किया जाता है तो ग्राम की लोकोपयोगी भूमि का स्वरुप यथावत रहेगा।
निर्देश में कहा गया है कि निस्तार की किसी मद- इमारती लकड़ी या ईधन के क्षेत्र, घास, चारागाह, बीड, कब्रिस्तान तथा शमशान, गौठान, शिविर, खलिहान, बाजार, खाद के गडढे, खाल निकालने का स्थान, पाठशाला, खेल का मैदान, सडक़, गली, नाली या अन्य लोक प्रयोजन के रूप में रक्षित है या नहीं, यह निस्तार की मद नोइयत के रूप दर्ज की जाती हैं।
भूमि वस्तुत: निस्तार पत्रक में रक्षित श्रेणी की है अथवा नहीं, इसकी पुष्टि खसरा के कॉलम नम्बर 12 के बिंदु 3 अन्य अभ्युक्तियां के रूप में प्रविष्टि अंकित होना चाहिए। यह स्पष्ट किया जाता है कि कोई भूमि निस्तार के रूप में रक्षित है या नहीं, इसकी पुष्टि खसरा के कॉलम 12 की प्रविष्टि के आधार पर ही हो सकेगी।