भोपाल: वन विभाग ने 10 आईएफएस अफसरों को नए साल का तोहफा दिया है। 5 आईएफएस अफसरों को प्रमोशन और इतने ही अफसरों को सिलेक्शन ग्रेड का तोहफा दिया है. एक आईएफएस की लंबे समय से मांगी मुराद भी पूरी हुई है.

वन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार 1998 बैच के आईएफएस अधिकारी हरीश चंद्र गुप्ता को  मुख्य वन संरक्षक से अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पद पर प्रमोट करते हुए वही पदस्थ किया गया है. इसी प्रकार सीहोर डीएफओ अनुपम सहाय, सिंगरौली डीएफओ मधु वी राज, भोपाल डीएफओ आलोक पाठक और डीएफओ अनिल शुक्ला को वन संरक्षक के पद पर पदोन्नत किया है.

वन विभाग ने उनके पद को अपग्रेड भी कर दिया है. नए साल के अंतिम वर्किंग डे पर 2016 बैच के आईएफएस अमित बसंत निकम की मांगी मुराद पूरी हुई है. निकम लंबे समय से अपनी पदस्थापना मुख्यालय से छिंदवाड़ा कराने के लिए सीनियर अधिकारियों की गणेश परिक्रमा की, जिसका परिणाम सुखद रहा. निकम को उप वन संरक्षक प्रधान मुख्य वन संरक्षक मुख्यालय भोपाल से डीएफओ छिंदवाड़ा उत्पादन वन मंडल में पदस्थ किया है.

इसके साथ ही अक्षय राठौर को डीएफओ छिंदवाड़ा उत्पादन वन मंडल से  वन मंडल अशोक नगर में पदस्थ किया गया है. अशोकनगर वन मंडल में डीएफओ का पद 6 महीने से अधिक रिक्त था.

इन्हें मिला सिलेक्शन ग्रेड का लाभ

वर्ष 2010 बैच के 5 आईएफएस अधिकारियों को प्रवर श्रेणी वेतनमान तोहफा दिया है. जिन आईएफएस अफसरों को प्रवर श्रेणी वेतनमान का लाभ दिया गया है, उनमें रिपुदमन सिंह भदोरिया, रविंद्र मणि त्रिपाठी, वासु कनौजिया, गौरव चौधरी और अंजना सुचिता तिर्की शामिल है.

महीनों से रिक्त एपीसीसीएफ सीसीएफ और डीएफओ के पद

मुख्यालय सतपुड़ा में एपीसीसीएफ के विकास, भू-अभिलेख, समन्वय, वित्त एवं बजट, और संयुक्त वन प्रबंधन शाखा के पद रिक्त पड़े हैं. इसी प्रकार रीवा, छिंदवाड़ा, बालाघाट और ग्वालियर सर्किल में मुख्य वन संरक्षक के पद रिक्त है. इसके अलावा बेस्ट टाइगर रिजर्व में संचालक के पद भी रिक्त है, जिस पर सीसीएफ की पदस्थापना की जानी है. इसके अलावा राजगढ़, पूर्व छिंदवाड़ा, पश्चिम मंडला, रतलाम और बड़वाह वन मंडल के पद भी खाली पड़े हुए हैं.

इन सभी पदों को मैनेजमेंट कोटे और राजनीतिक रसूख के दम पर भरे जाने की कवायद चल रही है. यही वजह है कि सूचियां बन और बिगड़ भी रही है. एक हफ्ते पहले ही पन्ना उत्तर वनमंडल में एक टाइगर की शिकारी के फंदे में फंसने से मौत हो गई थी. इस घटना के बाद एसीएस जेएस कंसोटिया घटनास्थल पर भी पहुंचे थे. वहां उन्हें अधिकारियों ने बताया कि कई महीनों से डीएफओ और एसडीओ के पद का लिखते हैं और उन्हें भरने की कोई कोशिश नहीं की जा रही है.