विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राज्य में यात्राओं की बाढ़ सी आ गई है. सत्ता दल बीजेपी जन आशीर्वाद से यात्रा निकाल रही है, वहीं प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस की जन आक्रोश यात्रा चल रही है. इन दोनों यात्राओं के बीच में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं छतरपुर जिले में एसडीएम निशा बांगरे अपने इस्तीफे को स्वीकार कराने के लिए भोपाल तक न्याय यात्रा पर निकल गईं हैं. नौ अक्टूबर को उनकी न्याय यात्रा भोपाल पहुंचेगी. एसडीएम इस्तीफे को स्वीकार नहीं करने के खिलाफ हाईकोर्ट तक पहुंच चुकी हैं और वहां से 10 दिन में निराकरण के निर्देशों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर आला अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठाए हैं. 

राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी निशा बांगरे अनुसूचित जाति की हैं और बैतूल जिले के आमला की हैं. करीब साढ़े तीन महीने पहले अपने मकान के गृह प्रवेश के लिए शासन द्वारा अनुमति नहीं देने के बाद इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वे गृह प्रवेश कार्यक्रम में शामिल हुईं थीं. निशा विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं लेकिन उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं होने से वे परेशान हैं. वे हाईकोर्ट तक इसके लिए लड़ाई लड़ चुकी हैं लेकिन उनका आरोप है कि वहां भी राज्य शासन द्वारा गलत ढंग से जानकारी देकर इस्तीफे को लटकाकर रखा जा रहा है.

यात्रा पर निकलीं निशा

निशा बांगरे ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए गृह कस्बे से भोपाल तक की न्याय यात्रा शुरू की है। सुबह 11 बजे आमला में यज्ञ करने के बाद उन्हें उनके पति, तीन साल के बच्चे और मां-मामा ने पैदल यात्रा के लिए रवाना किया। उनकी यात्रा में चार पहिया गाड़ी पर रथ भी चल रहा है और रास्ते में उन्हें लोगों द्वारा सराहा जा रहा है। लोगों का आशीर्वाद लेने वे उनके घर तक पहुंच रही हैं.