भोपाल: प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित पालपुर कूनो में चीते लाने के बाद अब मंदसौर जिले के गांधी सागर अभयारण्य में चीतों को बसाया जायेगा जिसके लिये राज्य सरकार ने सैध्दांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है। अभी पालपुर कूनो में आठ चीते हैं जो नामीबिया देश से आये हैं। आगे अफ्रीका से और चीते आने हैं।
वन विभाग ने गांधी सागर अभयारण्य में चीतों को बसाने के लिये वहां चीतलों की व्यवस्था करना प्रारंभ कर दी है। राजगढ़ से दो सौ चीतल पहले से ही वहां शिफ्ट किये जा चुके हैं तथा शेष 400 चीतल और वहां शिफ्ट किये जायेंगे जिससे इन चीतों को आहार मिल सके। उल्लेखनीय है कि सामान्यतया चीता किसी अन्य का शिकार किया जानवर नहीं खाता है तथा न ही किसी अन्य के द्वारा किया गया शिकार छीनकर खाता है। वह खुद ही शिकार कर अपने भोजन का प्रबंध करता है।
गांधी सागर अभयारण्य में लाये जाने वाले चीते पालपुर कूनो से ही आयेंगे। विदेश से आने वाले सभी चीते पालपुर कूनो में ही उतारे जायेंगे तथा वहां से इन्हें गांधी सागर अभयारण्य भेजा जायेगा। अभी पालपुर कूनो के चीतों को भी बड़े बाड़ों से जंगल के खुले क्षेत्र में छोड़ा जाना है। चूंकि यह पहला प्रोजेक्ट है, इसलिये इनकी सुरक्षा पर काफी ध्यान दिया जा रहा है।
खुले में रहने पर इनके लिये तेन्दुये और झुण्ड में घूमने वाले जंगली कूत्तों एवं हायना की भी चुनौति रहेगी। चूंकि चीते बड़ी उम्र के लाये जा रहे हैं इसलिये वे इनसे अपने को बचाने में सक्षम रहेंगे क्योंकि कम उम्र के चीतों को अन्य जानवर मारकर खा जाते हैं। गांधी सागर अभयारण्य के बाद सागर जिले के नौरादेही अभयारण्य में भी दूसरे चरण में चीते बसाये जायेंगे।
दो माह बाद चीतों को खुला छोड़ा जायेगा :
पालपुर कूनो में बड़े बाड़ों में रह रहे आठ चीतों को दो माह बाद खुले जंगल में छोड़ दिया जायेगा। साथ ही इनके पर्यटकों द्वारा दर्शन के लिये अभयारण्य को भी खोल दिया जायेगा। इसके लिये सीएम ने निर्देश दिये हैं। इधर कूनो में रह रहे चीतों की सुरक्षा के संबंध में वन्यप्राणी शाखा ने कहा कि शिकारियों द्वारा कूनो राष्ट्रीय उद्यान श्योपुर में कैमरा ट्रेप तोडक़र जलाये जाने की घटना सामने आई थी।
जांच में पाया गया है कि उक्त घटना चीता के भारत आगमन के पूर्व की है जिसमें 2 स्थान पर कैमरा ट्रेप तोडक़र जलाये जाने पर संबंधित पुलिस थाने में अपराधिक प्रकरण दर्ज करवाया गया है। साथ ही पार्क में वर्तमान स्थिति में समस्त चीतों का पुख्ता तरीके से सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। चीता की सुरक्षा हेतु पार्क में पदस्थ अधिकारी/कर्मचारी/सुरक्षा श्रमिक, भूतपूर्व सैनिक तथा ड्रोन के माध्यम से एवं डॉग स्क्वाड की सहायता से क्षेत्र की निगरानी की जा रही है।