भोपाल: मध्य प्रदेश में फिर से सरकार बनाने की कवायद में जुटी भारतीय जनता पार्टी ने अपने ताजा सर्वे में नाजुक हालत के संकेत मिलते ही रणनीति बदल दी है।जीतने की हर संभव कोशिश कर रही पार्टी के रणनीतिकार विवश हो गए हैं, कि उन्हें अपने हैवीवेट नेताओं को मध्य प्रदेश की विधानसभा सीटों पर उतारना पड़ा है। संभावित भय के चलते पार्टी ने अपने तीन केंद्रीय मंत्री सर्वश्री नरेंद्र सिंह तोमर ,फग्गन सिंह कुलस्ते और प्रहलाद सिंह पटेल को मध्य प्रदेश की विधानसभा सीटें फतेह करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही संगठन के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को भी अपने पुराने क्षेत्र इंदौर से चुनावी समर में झोंका है।
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तिथि घोषित होने के बहुत पहले ही 230 विधानसभा सीटों वाले प्रदेश में से 78 उम्मीदवारों की घोषणा कर भाजपा ने कांग्रेस से बाजी मार ली है। पार्टी ने पहली सूची में वे 39 उम्मीदवार उतारे थे, जहां पर कांग्रेस पिछले चुनाव में बाज़ी झपट चुकी थीं ,और अब जबकि दूसरी सूची आई है उसमें उन सीटों पर दावेदार उतारे गए हैं ,जहां पार्टी को हार का अंदेशा है। कुल मिलाकर मंत्रियों और सांसदों को मध्य प्रदेश में भेजा जाना कोई आश्चर्य का विषय नहीं बल्कि रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
पार्टी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने बहुत पहले ऐलान कर दिया था कि मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव अति सावधानी से होंगे और पार्टी हर हाल में जीतने वाले उम्मीदवारों को ही मैदान में उतरेगी। इससे स्पष्ट है कि वर्तमान विधायकों के चेहरे एंटी इनकंबेंसी के दायरे में आ रहे थे इसलिए उनके स्थान पर नए चेहरों को मैदान में मुकाबले के लिए भेजा जा रहा है ।केंद्रीय मंत्रियों को विधानसभा चुनाव में झोंकने के पीछे पार्टी की मजबूरी भी और रणनीति भी।अभी तक जो 78 उम्मीदवार घोषित किए गए हैं उनमें मालवा के और निमाड़ के 22, महाकौशल के 18, ग्वालियर और चंबल संभाग से 15 नाम की घोषणा हुई है।
सत्ता विरोधी सुर सुन लेने के बाद पार्टी के चाणक्य अमित शाह ने अपनी रणनीति बदली और पुराने भरोसेमंद कैलाश विजयवर्गी को इंदौर 1 विधानसभा सीट से, नरेंद्र सिंह तोमर को दिमनी से, प्रहलाद सिंह पटेल को नरसिंहपुर से ,राकेश सिंह को जबलपुर पश्चिम से, रीति पाठक को सीधी से,सतना से गणेश सिंह को और निवास सीट से फग्गन सिंह कुलस्ते तथा गाडरवारा से उदय प्रताप सिंह को उम्मीदवार बनाया है।
भारतीय जनता पार्टी की रणनीति जीतने वाले उम्मीदवार को टिकट देने की रही है ,इसलिए उनके अपने सर्वे और अंदरूनी रिपोर्ट के आधार पर प्रत्याशी चयन किया गया है। शेष बचे प्रत्याशियों के चयन में भी यही फार्मूला लागू होगा, क्योंकि राष्ट्रीय नेतृत्व यह जानता है कि मध्य प्रदेश में पार्टी के प्रति असंतोष नहीं है ,बल्कि व्यक्ति के प्रति एंटी इनकंबेंसी है और कार्यकर्ता प्रत्याशी को देख कर ही खुद को रिचार्ज करते हैं। गुजरात फार्मूला भी यही था वहां पर पार्टी ने विरोधी लहर भांप कर न केवल प्रत्याशी बल्कि अपने मुख्यमंत्री को ही चुनाव के पूर्व बदल दिया था।