राज्य में भाजपा और कांग्रेस के बीच विधानसभा में उभरी तल्खी पर होली का रंग नजर आना बाकी है। माना जा रहा है कि सोमवार को जब बजट सत्र फिर शुरू होगा, तब तक इन तल्खियों पर काबू पा लिया जाएगा और परस्पर समन्वय से कोई फार्मूला निकलेगा लेकिन इसके पहले कांग्रेस ने राजभवन पर जोरदार प्रदर्शन की रूपरेखा पर अडिग रहकर सरकार को परेशानी में डाल दिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने आज कांग्रेस के राजभवन पर प्रदर्शन को लेकर भाजपा के सवालों पर कहा कि यह समझ लीजिए की विधानसभा में चर्चा से ना सिर्फ आपकी सरकार भागती है बल्कि किसानों का मुद्दा उठाने पर आपने कांग्रेस के विधायक जीतू पटवारी को असंवैधानिक तरीके से निलंबित कराया।
सौदेबाजी की सरकार विधानसभा में मनमानी कर सकती है, लेकिन प्रदेश की जनता का मुंह बंद नहीं कर सकती। आपकी सरकार की इन्हीं असंवैधानिक हरकतों और जनविरोधी सोच का पर्दाफाश करने के लिए कांग्रेस भोपाल में प्रदर्शन करेगी, आपको जो हथकंडे अपनाने हैं अपना लीजिए। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस आगामी 13 मार्च को भोपाल में यह प्रदर्शन कर रही है।
जबकि इसी दिन से विधानसभा का सत्र फिर शुरू होने वाला है। सत्र के दौरान गत सप्ताह पटवारी को निलंबित करने के बाद कांग्रेस भी सत्तापक्ष के नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोले बैठी है। इधर कमलनाथ ने महिलाओं के मामले में यह भी कहा है कि 'शिवराज महिला हित के सवाल ना पूछें तो ही अच्छा है। अपने 18 साल के शासन में मध्यप्रदेश को महिला अत्याचार में पूरे देश में नंबर वन बनाने के बाद आप किस मुंह से यह सवाल पूछ रहे हैं। आपने अब तक जितने घोषणापत्र तैयार किए, उनमें महिलाओं से किया कोई वादा नहीं निभाया है। '
पटवारी ने शिवराज को लिखा पत्र
इधर कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखे पत्र में स्वयं के लिए प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बताते हुये ओलावृष्टि से हुए फसलों के नुकसान की जानकारी देते हुए तत्काल सर्वे कराकर किसानों को राहत देने और तीन हजार रुपये प्रति क्विटल समर्थन मूल्य देने की मांग की है। वहीं भाजपा प्रवक्ता डा. हितेष वाजपेयी ने चुटकी ली है कि पटवारी वाकई में कांग्रेस के अध्यक्ष बनने लायक है, जिन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ को चुनौती दे रखी है। वे पहले ही कह चुके हैं कि मेरी नियुक्ति राहुल गांधी ने की है और मुझे हटाए जाने के कोई निर्देश नहीं मिले हैं।
विंध्य को साधने दिग्विजय कल तीन दिन के दौरे पर
कांग्रेस ने तीस सीट वाले विंध्य को साधने के लिये नये सिरे से कोशिशें शुरू कर दी है। इस सिलसिले में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह संगठन की नब्ज टटोलने व नेताओं से बातचीत के लिये कल पहुंच रहे हैं। वे तीन दिन तक विंध्य क्षेत्र में रहकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक लेंगे। सिंह कल सबसे पहले कल सतना पहुंचेंगे। वे यहां कांग्रेस के स्थानीय और वरिष्ठ नेताओं, पुराने कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे।
इसके बाद रामपुर बघेलान विधानसभा और 11 मार्च को रीवा विधानसभा और 12 मार्च को मनगवां और त्योंथर विधानसभा के अंतर्गत ब्लॉक, मंडलम सेक्टर कमेटियों की बैठक लेंगे। बैठक में दिग्विजय सिंह एक-एक अध्यक्ष से उसके क्षेत्र में दिए गए टास्क की स्टेटस रिपोर्ट तलब करेंगे। किस ब्लॉक, मलम सेक्टर में कौन सा काम अधूरा है। बैठक के बाद निष्क्रिय और काम में लापरवाही करने वाले पदाधिकारियों की रिपोर्ट बनाकर पीसीसी चीफ कमलनाथ को देंगे। ज्ञात हो बीते चुनाव में इस इलाके से महज पांच सीट मिलने से कांग्रेस को जोरदार झटका लगा था।
इधर भाजपा की नजर चंबल पर
दूसरी तरफ भाजपा ने ग्वालियर चंबल में कांग्रेस का प्रभाव कम करने के लिये कई रणनीतियां बना ली हैं। सत्ता की चाबी के लिए ग्वालियर-चंबल अंचल काफी महत्वपूर्ण है। दोनों संभागों में विधानसभा की 34 सीटें हैं। कांग्रेस ने 2018 में 33 साल बाद यहां जोरदार जीत दर्ज करते हुये 26 सीटें हासिल की थी, जबकि भाजपा सात सीटों पर सिमट गई थी।
अब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर हर सप्ताह ग्वालियर-चंबल अंचल का दौरा कर रहे हैं। 2020 में सिंधिया के भाजपा में जाने से इन्हीं दो अंचल के कारण कमलनाथ सरकार गिरी थी। अब दोनों दलों की नजर अंचल अजाजजा व ओबीसी वोटर्स पर है।