राजसात वाहनों का सरकारी नंबर लेकर विभागीय उपयोग होगा


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स्टोरी हाइलाइट्स

जारी निर्देशों में कहा गया है कि सभी वनमंडलों के अंतर्गत वन अपराध प्रकरणों में राजसात किए गए वाहनों में यदि कोई वाहन विभागीय उपयोग हेतु उपलब्ध हो, तो उसका विधिवत प्रस्ताव तैयार कर मुख्य वनसंरक्षक विभागीय उपयोग करने की अनुमति प्रदान करेंगे..!!

भोपाल: राज्य का वन विभाग विभिन्न वन अपराधों में राजसात किये गये वाहनों का सरकारी नंबर लेकर उनका विभागीय कार्यों में उपयोग करेगा। इस संबंध में उच्च स्तर से निर्देश जारी किये गये हैं।

जारी निर्देशों में कहा गया है कि सभी वनमंडलों के अंतर्गत वन अपराध प्रकरणों में राजसात किए गए वाहनों में यदि कोई वाहन विभागीय उपयोग हेतु उपलब्ध हो, तो उसका विधिवत प्रस्ताव तैयार कर मुख्य वनसंरक्षक विभागीय उपयोग करने की अनुमति प्रदान करेंगे। साथ ही अपर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (समन्वय) भोपाल मुख्यालय से वाहन उनके वनमण्डल को आवंटित करायेंगे एवं आरटीओ भोपाल से सरकारी नंबर एमपी 02 प्राप्त करेंगे। यदि उनके वनमंडल में वाहनों की आवश्यकता न हो, तो अन्य वनमंडलों से वाहन उपयोग में लिए जाने का अनुरोध कर सकते हैं। राजसात की कार्यवाही समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश भी दिये गये हैं।

ये भी दिये गये निर्देश :

लंबित एवं कालातीत वन अपराध प्रकरणों की समीक्षा वनमंडल स्तर पर स्वयं वनमंडलाधिकारी निरंतर करते रहें ताकि कोई प्रकरण कालातीत न हो सके। इसे अत्यंत गंभीरता से लिया जावे। मुख्य वनसंरक्षक भी समय-समय पर मासिक बैठक में इस बिन्दु समीक्षा कर यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई प्रकरण कालातीत न हो। भारतीय वन अधिनियम 1927 में हुए नवीन संशोधनों का अध्ययन कर अधीनस्थ स्टाफ को अवगत कराया जाये।

आदिवासियों पर दर्ज केस वापस होंगे :

उच्च स्तर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि सभी वनमंडलाधिकारी आदिवासियों के ऊपर दर्ज किये गये वन अपराध प्रकरणों को शासन की मंशा के अनुरूप नियमानुसार त्वरित रूप से नस्तीबद्ध करने हेतु कार्यवाही करें। इसके अलावा, वन क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही भी की जाये।  अपील के समस्त लंबित प्रकरण तीन माह में पूर्ण करना सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया। अग्नि के प्रकरणों पर त्वरित एवं गंभीरतापूर्वक कार्यवाही की जावे। वर्तमान में एनजीटी में प्रचलित प्रकरण में परिक्षेत्र से लेकर वृत्त स्तर तक अतिक्रमण की जानकारी भेजी जाये तथा उक्त जानकारी में वर्किंग प्लान में उल्लेखित अतिक्रमण एवं दर्ज पीओआर के आधार पर अतिक्रमण की जानकारी भेजी जाये।